
पीरियड्स से जुड़ी बीमारी छिपाकर शादी का आरोप,High Court ने पत्नी की अपील खारिज की, कहा—रिश्ता सुधारना संभव नहीं
बिलासपुर। Chhattisgarh High Court ने तलाक संबंधी फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ पत्नी की अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि दंपती के बीच वैवाहिक संबंधों में सुधार की कोई संभावना नहीं है और प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर तलाक का फैसला उचित है।
पति का आरोप—पत्नी ने 10 साल से पीरियड्स न आने की बीमारी छिपाई
पति ने अदालत में दावा किया कि पत्नी ने पीरियड्स न आने की गंभीर समस्या शादी से पहले छिपाई थी, जिसे उसने मानसिक क्रूरता बताया। उसके अनुसार, एक दिन पत्नी ने बताया कि उसकी माहवारी रुक चुकी है। वह उसे डॉक्टर के पास लेकर गया, जहां पत्नी ने स्वयं स्वीकार किया कि वह पिछले 10 साल से पीरियड्स न आने की समस्या से जूझ रही है।

डॉक्टरों की जांच में सामने आई गर्भधारण की गंभीर समस्या
पति ने बताया कि अन्य डॉक्टरों से कराई गई जांच में भी पुष्टि हुई कि पत्नी को गर्भधारण में गंभीर चिकित्सीय समस्या है। पति का आरोप था कि यह जानकारी पत्नी और उसके परिवार ने जानबूझकर विवाह से पहले छिपाई।
इस पर पत्नी ने अदालत में कहा कि यदि वह यह बात पहले बता देती, तो पति शादी से मना कर देता, इसलिए उसने मजबूरी में शादी के बाद यह बात बताई।
डिवीजन बेंच बोली—दोनों के बीच तालमेल संभव नहीं
मामले की सुनवाई Rajni Dubey और Amitendra Kishore Prasad की डिवीजन बेंच ने की। अदालत ने पाया कि दोनों लंबे समय से अलग रह रहे हैं और संबंध पूरी तरह टूट चुके हैं। इसलिए पत्नी की अपील निरस्त करते हुए फैमिली कोर्ट का तलाक का निर्णय बरकरार रखा गया।
न्यायालय ने कहा—छिपाई गई जानकारी मानसिक क्रूरता के दायरे में
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि गंभीर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जानबूझकर छिपाना पति के प्रति मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है, खासकर जब मामला वैवाहिक जीवन और भविष्य की संतति से जुड़ा हो।
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