
पीएम मोदी 5 देशों की यात्रा पर रवाना, 17 वें ब्रिक्स सम्मेलन में लेंगे हिस्सा
नई दिल्ली, 2 जुलाई ,2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बुधवार से अपनी महत्वपूर्ण पांच देशों की यात्रा पर रवाना हो गए हैं। इस आठ दिवसीय दौरे की शुरुआत घाना से होगी, जो किसी भारतीय प्रधानमंत्री की तीन दशकों में पहली यात्रा है। इसके बाद वे त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया की यात्रा करेंगे। यह दौरा भारत की वैश्विक कूटनीति, खासकर ग्लोबल साउथ के साथ संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
घाना: ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत
प्रधानमंत्री मोदी का दौरा घाना से शुरू होगा, जहां वे 2 से 3 जुलाई तक रहेंगे। अकरा के कोटोका अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुबह 8:00 बजे IST पर उनका पूरे औपचारिक सम्मान के साथ स्वागत किया जाएगा। इसके बाद, वे घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा के साथ जुबली हाउस में उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान दोनों नेता भारत और घाना के बीच मजबूत संबंधों की समीक्षा करेंगे और आर्थिक, ऊर्जा, रक्षा, स्वास्थ्य, और विकास सहयोग जैसे क्षेत्रों में नए अवसर तलाशेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा भारत की इकोनॉमिक कम्युनिटी ऑफ वेस्ट अफ्रीकन स्टेट्स (ECOWAS) और अफ्रीकी संघ के साथ साझेदारी को और गहरा करेगी।

प्रधानमंत्री घाना की संसद को भी संबोधित करेंगे और वहां रहने वाली 15,000 से अधिक भारतीय मूल की आबादी के साथ बातचीत करेंगे। दिन का समापन राष्ट्रपति महामा द्वारा आयोजित राजकीय रात्रिभोज के साथ होगा। भारत और घाना के बीच 3.13 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार और भारत का 2 बिलियन डॉलर का निवेश इस रिश्ते की मजबूती को दर्शाता है।
त्रिनिदाद और टोबैगो: ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को नया आयाम
3 से 4 जुलाई को, पीएम मोदी त्रिनिदाद और टोबैगो की यात्रा करेंगे, जो 1999 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। इस दौरान वे राष्ट्रपति क्रिस्टीन कार्ला कांगालू और प्रधानमंत्री कमला पर्साद-बिसेसर के साथ मुलाकात करेंगे। यह यात्रा दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करेगी, खासकर जब 2025 में त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय आप्रवासियों के आगमन की 180वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। पीएम मोदी वहां की संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे और भारतीय डायस्पोरा के साथ जुड़ेंगे, जो कैरिबियन क्षेत्र में सबसे बड़ा भारतीय मूल का समुदाय है।
अर्जेंटीना: रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा
4 से 5 जुलाई को, पीएम मोदी अर्जेंटीना की यात्रा करेंगे, जहां वे राष्ट्रपति हाविएर मिलेई के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। यह यात्रा भारत और अर्जेंटीना के बीच रक्षा, कृषि, खनन, तेल और गैस, नवीकरणीय ऊर्जा, व्यापार और लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत करेगी। यह 60 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली पूर्ण द्विपक्षीय यात्रा होगी, जो दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम देगी।
ब्राजील: 17वां ब्रिक्स सम्मेलन और रणनीतिक वार्ता
5 से 8 जुलाई तक, पीएम मोदी ब्राजील में होंगे, जहां वे रियो डी जनेरियो में 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह उनकी ब्राजील की चौथी यात्रा होगी। सम्मेलन में वैश्विक शासन सुधार, शांति और सुरक्षा, बहुपक्षीयता को मजबूत करने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का जिम्मेदार उपयोग, जलवायु कार्रवाई, वैश्विक स्वास्थ्य और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके बाद, ब्रासीलिया में वे राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसमें व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित होगा। भारत और ब्राजील के बीच 12.2 बिलियन डॉलर का व्यापार और मर्कोसुर व्यापार समझौते का विस्तार इस साझेदारी की मजबूती को दर्शाता है।
नामीबिया: ऐतिहासिक संबंधों का उत्सव
दौरे का समापन 9 जुलाई को नामीबिया में होगा, जो पीएम मोदी की पहली और भारत के किसी प्रधानमंत्री की तीसरी यात्रा होगी। वे राष्ट्रपति नेतुम्बो नांदी-एंडाइतवाह के साथ वार्ता करेंगे और नामीबिया की संसद को संबोधित करेंगे। दोनों देशों के बीच स्वतंत्रता संग्राम की साझा विरासत और 600 मिलियन डॉलर का व्यापार इस यात्रा को खास बनाता है। इसके अलावा, 2022 में नामीबिया से भारत में चीतों के स्थानांतरण जैसे सहयोग पर भी चर्चा होगी।
कूटनीतिक महत्व
यह दौरा भारत के ग्लोबल साउथ के साथ गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। पीएम मोदी ने अपने प्रस्थान बयान में कहा, “मुझे विश्वास है कि इन पांच देशों की मेरी यात्राएं ग्लोबल साउथ में हमारी दोस्ती को मजबूत करेंगी, दोनों महासागरों के किनारों पर हमारी साझेदारी को बढ़ाएंगी और ब्रिक्स, अफ्रीकी संघ, ECOWAS और CARICOM जैसे बहुपक्षीय मंचों में हमारी भागीदारी को गहरा करेंगी।”
यह यात्रा भारत की ब्रिक्स की 2026 में अध्यक्षता से पहले वैश्विक मंच पर उसकी स्थिति को और मजबूत करेगी।
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