
पाली: Folding ठेकेदार मुकेश की आत्महत्या ने उठाए सवाल
पाली, राजस्थान में फोल्डिंग ठेकेदार मुकेश की आत्महत्या का मामला अब गहरे पारिवारिक और सामाजिक संकट के रूप में सामने आ रहा है। इस घटना ने न सिर्फ एक खुशहाल परिवार को तोड़ दिया बल्कि समाज में रिश्तों, भरोसे और जिम्मेदारी को लेकर भी गहरे सवाल उठाए हैं।

मुकेश का विवाह नवंबर 2012 में हुआ था। उसकी पत्नी रेखा और दो बेटे हैं। दोनों बेटों के जन्म में लगभग दो साल का अंतर है। पहले बेटे के जन्म के बाद 2013 में उसने पुनायता रोड पर एक नया मकान खरीदा और पत्नी को गिफ्ट किया। दूसरे बेटे के जन्म के समय भी उसने एक और नया मकान खरीदा। उस समय तक उसका पारिवारिक और सामाजिक जीवन सामान्य और स्थिर था।
करीब एक साल पहले रेखा ने सिलाई मशीन खरीदने के लिए बाजार में टेलरिंग सामग्री विक्रेता राहुल रांकावत से संपर्क किया। बताया जाता है कि राहुल सिलाई मशीन से जुड़ा सामान बेचने के साथ-साथ घर-घर जाकर सिलाई मशीन रिपेयरिंग का भी काम करता था। इसी बहाने दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ गईं और सिलसिलेवार मुलाकातें जारी रहीं।
धीरे-धीरे रेखा ने पति द्वारा गिफ्ट किए गए घर में रहना शुरू कर दिया और अंततः राहुल के साथ चली गई।
मानसिक तनाव और आत्महत्या
रेखा और राहुल के संबंधों का असर मुकेश के पारिवारिक जीवन पर गहराई से पड़ा। घर में कलह, विवाद और अविश्वास की स्थिति उत्पन्न होने लगी।
रेखा का देर रात घर से बाहर रहना, मोबाइल पर लगातार बातचीत और पैसों के लेन-देन जैसी गतिविधियों ने मुकेश को गंभीर मानसिक तनाव में डाल दिया।
हालांकि उसकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति स्थिर थी, लेकिन पारिवारिक टूटन के कारण वह गहरे अवसाद और मानसिक दबाव से जूझने लगा। 7 सितंबर को चामुंडा नगर स्थित अपने घर में उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट में उसने पत्नी के व्यवहार और राहुल के साथ संबंधों का विस्तार से जिक्र किया। इसमें ब्लैकमेलिंग, पैसों और गहनों पर कब्जा किए जाने की बातें भी दर्ज थीं।

पुलिस कार्रवाई और सबूत
घटना के बाद मुकेश की बहन प्रेमलता ने पुलिस में केस दर्ज कराया। उनका आरोप है कि पत्नी रेखा और राहुल रांकावत ने मिलकर मुकेश का शोषण किया और उसकी कमजोरी का फायदा उठाया।
- पुलिस को इस मामले में कई अहम सबूत मिले हैं, जिनमें शामिल हैं:
- सुसाइड नोट
- दो वीडियो
- सिलाई मशीन की खरीद की दुकान की पर्ची
इन सबूतों के आधार पर कोतवाल अनिल विश्नोई ने केस दर्ज किया और जांच अधिकारी सीओ सिटी राजेंद्र उज्जवल के नेतृत्व में कार्रवाई शुरू की। 8 सितंबर को आरोपी रेखा और राहुल को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया।
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