
ओडिशा में छात्रा के आत्मदाह के बाद विशाल प्रदर्शन, पुलिस ने किया पानी की बौछारों का उपयोग
छात्रा की आत्मदाह की घटना
ओडिशा के बालासोर जिले में फकीर मोहन स्वायत्त कॉलेज की 20 वर्षीय बी.एड. छात्रा ने 12 जुलाई 2025 को कथित तौर पर एक प्रोफेसर द्वारा यौन उत्पीड़न और कॉलेज प्रशासन की अनदेखी के कारण परिसर में खुद को आग लगा ली। भुवनेश्वर के एम्स अस्पताल में 95% जलने के कारण 14 जुलाई की रात को उसकी मृत्यु हो गई। छात्रा ने कॉलेज प्रिंसिपल, उच्च शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री तक अपनी शिकायत पहुंचाई थी, लेकिन कोई कार्रवाई न होने से वह हताश थी।
भुवनेश्वर में विरोध प्रदर्शन

16 जुलाई 2025 को भुवनेश्वर में ओडिशा विधानसभा के बाहर बीजू जनता दल (बीजेडी) के कार्यकर्ताओं ने इस घटना के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़ने की कोशिश कर रहे थे, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछारों का उपयोग किया। बीजेडी ने बालासोर में सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक बंद का आह्वान किया, जिसमें सड़कों पर टायर जलाए गए और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और शिक्षा मंत्री सूर्यबंशी सूरज के इस्तीफे की मांग की गई।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
बीजेडी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इस घटना को “सिस्टम की विफलता” करार देते हुए सरकार की निष्क्रियता को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि छात्रा ने कई अधिकारियों से मदद मांगी, लेकिन उसे न्याय नहीं मिला। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी पीड़िता के पिता से बात की और न्याय का आश्वासन दिया, इसे “समाज के लिए घाव” बताया। कांग्रेस और अन्य आठ विपक्षी दलों ने 17 जुलाई को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान बीजेडी के कई कार्यकर्ताओं, जिसमें उपाध्यक्ष देबी प्रसाद मिश्रा और पूर्व मंत्रियों प्रणब प्रकाश दास और प्रीति रंजन घड़ाई को हिरासत में लिया। प्रदर्शन के दौरान हिंसा की स्थिति में कई कार्यकर्ता घायल हुए, जिनमें से कुछ को अस्पताल में भर्ती कराया गया। कॉलेज के प्रिंसिपल दिलीप घोष और शिक्षा विभाग के प्रमुख समीर कुमार साहू को गिरफ्तार किया गया है, जबकि प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया गया है।
जांच और भविष्य की मांगें
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया और ओडिशा पुलिस को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने भी चार सदस्यीय तथ्य-जांच समिति गठित की है। बीजेडी और कांग्रेस ने इस मामले में न्यायिक जांच की मांग की है, जबकि प्रदर्शनकारी सरकार से महिलाओं की सुरक्षा और शैक्षणिक संस्थानों में बेहतर तंत्र की मांग कर रहे हैं। यह घटना ओडिशा में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठा रही है।
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