
नीरव मोदी का भाई नेहल मोदी अमेरिका में गिरफ्तार: ईडी और CBI की अपील पर कार्रवाई, PNB घोटाले में वांछित
नई दिल्ली/Washington, 5 जुलाई 2025
भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी के छोटे भाई नेहल मोदी को संयुक्त राज्य अमेरिका में गिरफ्तार कर लिया गया है। यह गिरफ्तारी भारत की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की गई प्रत्यर्पण अपील के आधार पर 4 जुलाई 2025 को हुई। नेहल मोदी पर 13,000 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले में शामिल होने का आरोप है, जो भारत के इतिहास में सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में से एक है।
गिरफ्तारी का विवरण
अमेरिकी न्याय विभाग ने भारतीय अधिकारियों को सूचित किया कि नेहल मोदी को शुक्रवार, 4 जुलाई को हिरासत में लिया गया। अमेरिकी अभियोजकों ने दो आरोपों के आधार पर प्रत्यर्पण की कार्यवाही शुरू की है: पहला, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 3 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग, और दूसरा, भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और 201 (साक्ष्य नष्ट करना) के तहत। नेहल पर आरोप है कि उन्होंने अपने भाई नीरव मोदी की मदद से अवैध धन को शेल कंपनियों और विदेशी लेनदेन के जरिए छिपाया।
PNB घोटाले में नेहल की भूमिका
ईडी और सीबीआई की जांच में पता चला है कि नेहल मोदी ने नीरव मोदी के साथ मिलकर पीएनबी घोटाले से प्राप्त अवैध धन को लॉन्डर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच के अनुसार, नेहल ने यूएई, हांगकांग, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स और अन्य स्थानों पर शेल कंपनियों के नेटवर्क के माध्यम से धन को स्थानांतरित किया। घोटाला सामने आने के बाद, नेहल ने कथित तौर पर 50 किलोग्राम सोना और बड़ी मात्रा में नकदी दुबई से हटाई, साथ ही शेल कंपनियों के डमी निदेशकों को निर्देश दिया कि वे जांच में उनका नाम न उजागर करें।
कानूनी प्रक्रिया और अगली सुनवाई
नेहल मोदी की अगली सुनवाई 17 जुलाई 2025 को निर्धारित की गई है, जिसमें वह जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, अमेरिकी अभियोजकों ने जमानत का विरोध करने का इरादा जताया है, क्योंकि नेहल को फरार होने का जोखिम माना जा रहा है। भारतीय अधिकारी नेहल के प्रत्यर्पण के लिए कानूनी और कूटनीतिक प्रयास तेज कर रहे हैं, ताकि उन्हें भारत लाकर मुकदमे का सामना कराया जा सके।
PNB घोटाले का पृष्ठभूमि
पंजाब नेशनल बैंक घोटाला 2018 की शुरुआत में सामने आया था, जिसमें नीरव मोदी, उनके चाचा मेहुल चोकसी और अन्य सहयोगियों ने पीएनबी की मुंबई शाखा से फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के जरिए 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की थी। इस घोटाले ने भारतीय बैंकिंग क्षेत्र को हिलाकर रख दिया था। नीरव मोदी वर्तमान में लंदन की जेल में हैं और भारत प्रत्यर्पण की कोशिश कर रहा है, जबकि मेहुल चोकसी को हाल ही में बेल्जियम में गिरफ्तार किया गया है।
जांच में अन्य खुलासे
ईडी के अनुसार, नेहल ने नीरव के करीबी सहयोगी मिहिर आर. भंसाली के साथ मिलकर घोटाले के बाद महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट किए, जिसमें यूएई में सर्वर और मोबाइल उपकरण शामिल थे। नेहल पर यह भी आरोप है कि उन्होंने गवाहों को धमकाया और जांच को बाधित करने के लिए डमी कंपनियों का इस्तेमाल किया। नेहल को पहले भी 2019 में इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था, जिसे बाद में कुछ समय के लिए हटाया गया था, लेकिन अब उनकी गिरफ्तारी से भारत की जांच में नया मोड़ आया है।
भारत सरकार का रुख
भारतीय अधिकारियों ने नेहल की गिरफ्तारी को पीएनबी घोटाले की जांच में एक बड़ी सफलता बताया है। एक वरिष्ठ ईडी अधिकारी ने कहा, “यह गिरफ्तारी न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अवैध धन का जाल कई देशों में फैला हुआ था, लेकिन अब कानूनी प्रक्रिया इसे पकड़ रही है।” भारत सरकार अब नेहल के प्रत्यर्पण के लिए अमेरिकी अदालतों में मजबूत दस्तावेज और साक्ष्य पेश करने की तैयारी कर रही है।
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