
NHM कर्मचारियों की बर्खास्तगी पर सियासत गरमाई, कांग्रेस ने भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्वास्थ्य विभाग के एनएचएम (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) कर्मचारी लंबे समय से अपनी नियमितीकरण, वेतनमान और सेवा सुरक्षा की मांग लेकर हड़ताल पर हैं। सरकार ने आदेश दिया है कि जो कर्मचारी काम पर वापस नहीं लौटेंगे, उन्हें बर्खास्त किया जाएगा। इस आदेश का कांग्रेस ने कड़ा विरोध किया है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि भाजपा सरकार ने एनएचएम कर्मचारियों के साथ धोखा किया है। विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के नाम पर कर्मचारियों को वादा किया था कि सरकार बनने के बाद उनकी मांगों को पूरा किया जाएगा, लेकिन अब तक यह अधूरा है।
शुक्ला ने कहा, “सरकार 21 महीने से अधिक समय से सत्ता में है, लेकिन कर्मचारियों की बात नहीं सुन रही। जब वे अपनी मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं तो सरकार उन्हें नौकरी से बर्खास्त करने की धमकी दे रही है, जो तानाशाही है।”
स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने सभी जिलों के सीएमएचओ को कड़े निर्देश दिए हैं कि जो भी कर्मचारी हड़ताल छोड़कर काम पर वापस नहीं आएं, उन्हें तत्काल बर्खास्त कर दिया जाए। इस कदम के तहत बलौदाबाजार में 160, कोरबा में 21 और सूरजपुर में 594 से अधिक एनएचएम कर्मचारी बर्खास्त हो चुके हैं। कुल मिलाकर अब तक 794 से ज्यादा कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं।

एनएचएम कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों पर अड़े हुए हैं और माना जा रहा है कि वे सरकार के खिलाफ “जेल भरो आंदोलन” करेंगे। कर्मचारी संगठन का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे आंदोलन जारी रखेंगे।
इस हड़ताल के कारण प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर भी भारी असर पड़ा है, खासतौर पर बारिश के सीज़न में जब अधिक मरीज अस्पतालों में आते हैं।
सरकार ने साफ किया है कि किसी भी हाल में स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा और रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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