
Chhattisgarh:आंदोलनरत NHM के 25 अधिकारियों-कर्मचारियों की सेवा समाप्त
रायपुर, 04 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत 25 अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। यह कार्रवाई 18 अगस्त 2025 से शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल के बाद की गई, जिसमें कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत थे। सरकार द्वारा बार-बार नोटिस जारी करने और कार्य पर लौटने की चेतावनी के बावजूद कर्मचारियों के हड़ताल जारी रखने के कारण यह कठोर कदम उठाया गया।

हड़ताल से बाधित हुई स्वास्थ्य सेवाएं
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लगभग 16 हजार संविदा कर्मचारी 18 अगस्त से अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल के कारण प्रदेश भर में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कई अस्पतालों में ताले लटक गए, और मरीजों, विशेषकर ग्रामीण और गरीब तबके को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा। प्रसव और गंभीर बीमारियों के मामलों में मरीजों को निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ी।

क्या थीं कर्मचारियों की मांगें?
एनएचएम कर्मचारियों की 10 सूत्रीय मांगों में नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, स्थानांतरण नीति, न्यूनतम 10 लाख का चिकित्सा बीमा, और लंबित 27% वेतन वृद्धि प्रमुख हैं। 13 अगस्त 2025 को आयोजित कार्यकारिणी समिति की बैठक में इनमें से 5 मांगों पर सहमति बन गई थी, और शेष मांगों पर विचार-विमर्श चल रहा था। इसके बावजूद, कर्मचारियों ने हड़ताल जारी रखी।
सरकार का सख्त रुख
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने हड़ताली कर्मचारियों को कई बार नोटिस जारी कर कार्य पर लौटने का निर्देश दिया। 1 सितंबर को अंतिम चेतावनी दी गई थी कि 24 घंटे के भीतर काम पर न लौटने पर सेवा समाप्ति की कार्रवाई होगी। आदेश में कहा गया कि कर्मचारियों की अनुपस्थिति लोकहित के विरुद्ध है। इसके बाद भी हड़ताल जारी रहने पर सरकार ने बलौदाबाजार जिले में एनएचएम संघ के दो पदाधिकारियों, हेमंत सिंह और कौशलेश तिवारी, सहित 25 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया।
बस्तर में स्वास्थ्यकर्मी की मौत ने बढ़ाया आक्रोश
हड़ताल के बीच बस्तर जिले से एक दुखद खबर सामने आई, जहां 12 दिनों से आंदोलन में शामिल ब्लॉक अकाउंट मैनेजर बीएस मरकाम की हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई। इस घटना ने कर्मचारियों में आक्रोश और शोक की लहर पैदा कर दी, जिससे आंदोलन और उग्र हो गया। कर्मचारियों का कहना है कि नियमितीकरण न होने से उनका भविष्य अनिश्चित है, और कई परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
खून से लिखे पत्र, सरकार से अपील
हड़ताल के 15वें दिन, कर्मचारियों ने अपने आंदोलन को और मुखर करने के लिए जगदलपुर में खून से 100 पत्र लिखकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, और राज्यपाल को भेजे। इन पत्रों में उन्होंने सरकार से चुनावी वादों को पूरा करने और नियमितीकरण की मांग दोहराई। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, हड़ताल जारी रहेगी।
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