
Nepal हिंसा के बीच 15 हजार कैदी फरार, सेना की Firing में 2 की मौत
नेपाल में सोशल मीडिया प्रतिबंध के विरोध में शुरू हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी है, जिससे देशभर में अराजकता की स्थिति पैदा हो गई है। इन घटनाओं के बीच विभिन्न जेलों से लगभग 15,000 कैदी फरार हो गए हैं। खासकर रामेछाप जिले में जेल से भागने की कोशिश करते समय सेना की फायरिंग में दो कैदियों की मौत हो गई है, जबकि 10 अन्य घायल हुए हैं।

कैदियों की भारी संख्या में भागने की खबर
पिछले 48 घंटों में नेपाल में स्थिति बिगड़ गई है। सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन ने हिंसक रूप पकड़ लिया है। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और कई सरकारी इमारतों में आगजनी की। इस दौरान देश के कई जेलों से कैदी फरार हो गए। विशेषकर काठमांडू की दिल्लीबाजार जेल, चितवन, नक्कु, झुम्पका और जलेश्वर जैसी जेलों से 13,500 से अधिक कैदियों के भागने की रिपोर्ट है।
सेना की कार्रवाई और मौतें
रामेछाप की जेल में कैदियों ने भागने के लिए जेल तोड़ने का प्रयास किया, जिसे रोकने के लिए सेना को गोली चलानी पड़ी। यह नेपाल में सेना के नियंत्रण में आने के बाद हुई पहली बड़ी गोलीबारी की घटना है। इसके अलावा, पश्चिमी नेपाल के नौबस्ता सुधार गृह में सुरक्षाबलों के साथ हुई झड़प में पांच नाबालिग कैदियों की मौत हुई।
कर्फ्यू और नियंत्रण के उपाय
अराजकता को काबू करने के लिए नेपाल सेना ने पूरे देश में नियंत्रण ले लिया है। काठमांडू समेत कई शहरों में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है, जो सुबह तक प्रभावी होगा। सेना ने प्रदर्शनकारियों और उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। इसके साथ ही त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है, जिससे हजारों यात्री फंसे हुए हैं।
भारत-नेपाल सीमा पर हाई अलर्ट
हिंसा और कैदियों की फरारी के बाद भारत-नेपाल सीमा पर हाई अलर्ट जारी किया गया है। खबर है कि कुछ फरार कैदियों ने भारत में घुसपैठ की कोशिश की, जिनमें से पांच को सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने सिद्धार्थनगर के पास गिरफ्तार कर लिया।

तबाही का आंकड़ा
अब तक इस हिंसा में करीब 30 लोगों की मौत हो चुकी है और 1,000 से अधिक लोग घायल हैं। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्रियों और मंत्रियों के घरों पर हमला किया, बैंकों और होटलों में लूटपाट की और कई ऐतिहासिक इमारतों को आग के हवाले कर दिया। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया है और पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की अंतरिम मुख्य कार्यकारी के रूप में पद संभालेंगी।
यह हिंसा और जेल से कैदियों की बड़ी संख्या में फरारी नेपाल की राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।
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