
Naxal संगठन में फूट: गढ़चिरौली और उत्तर Bastar ने शांति वार्ता का किया समर्थन
दंतेवाड़ा। नक्सल संगठन के भीतर अब गंभीर अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। सरकार के साथ शांति वार्ता को लेकर नक्सलियों के दो बड़े डिवीजन—गढ़चिरौली और उत्तर बस्तर—ने विपक्षी खेमें से अलग रुख अपनाते हुए हथियार छोड़कर बातचीत के रास्ते को समर्थन दिया है। यह घटनाक्रम नक्सल आंदोलन में पहली बार इतनी स्पष्ट दो फाड़ का संकेत दे रहा है।

सोनू के बयान से शुरू हुई खींचतानहाल ही में चर्चित नक्सली कमांडर अभय उर्फ सोनू ने सरकार से शांति वार्ता की पहल करते हुए आत्मसमर्पण की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा था कि अब संघर्ष का तरीका बदलना चाहिए और लोकतांत्रिक माध्यमों से समस्याओं का समाधान खोजना चाहिए।
इस बयान के बाद संगठन के भीतर गुटबाजी शुरू हो गई।
- उत्तर बस्तर डिवीजनल कमेटी और गढ़चिरौली डिवीजन ने सोनू के इस बयान का खुलकर समर्थन किया है।
- इन दोनों डिवीजनों ने अपने पर्चों और सोशल मीडिया चैनलों के माध्यम से यह संदेश प्रसारित किया कि “जनसंघर्ष का रास्ता अब जनसंवाद से होकर गुजरना चाहिए।

“तेलंगाना समिति का विरोध
इसके विपरीत, तेलंगाना राज्य समिति ने सोनू के बयान की आलोचना करते हुए एक प्रेस नोट जारी किया। उसमें कहा गया कि हथियार डालना आंदोलन के उद्देश्य से विश्वासघात है और सरकार पर भरोसा करने की बजाय सशस्त्र संघर्ष को जारी रखना चाहिए।
इस रवैये से संगठन के भीतर विचारधारात्मक दरार साफ दिखाई देने लगी है।
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