
नक्सल प्रभावित क्षेत्र में तनावपूर्ण ड्यूटी कोई बहाना नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने CRPF जवान की हत्या मामले में सजा को सही ठहराया
रायपुर – छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अहम निर्णय में कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे सशस्त्र बलों के कर्मियों की तनावपूर्ण सेवा स्थितियाँ, अपने ही साथियों की हत्या जैसे जघन्य अपराध का औचित्य सही नहीं ठहरा सकते। कोर्ट ने केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के एक जवान को अपने चार साथियों की हत्या के मामले में मिली दोषसिद्धि को बरकरार रखा है।
यह मामला वर्ष 2011 का है, जब आरोपी कांस्टेबल ने ड्यूटी के दौरान अपने ही यूनिट के चार जवानों पर गोली चला दी थी, जिससे उनकी मृत्यु हो गई थी। आरोप था कि आरोपी मानसिक तनाव और सेवा संबंधी दबावों से परेशान था।
मामले में सत्र अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई थी। इस फैसले को आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि “देश की सुरक्षा में लगे सुरक्षाबलों से अनुशासन और संयम की अपेक्षा की जाती है। तनावपूर्ण स्थितियाँ हत्या जैसे कृत्य को जायज़ नहीं बना सकतीं।”
कोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी जोड़ा कि यदि इस प्रकार की दलीलें स्वीकार कर ली जाएं, तो इससे सुरक्षाबलों के भीतर गंभीर अनुशासनहीनता को बढ़ावा मिल सकता है, जो न केवल संगठन के लिए बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है।
फैसले के प्रमुख बिंदु:
- सेवा के तनाव और मानसिक दबाव को हत्या का आधार नहीं माना जा सकता।
- आरोपी ने जानबूझकर अपने साथियों पर गोली चलाई थी।
- सुरक्षाबलों में अनुशासन सर्वोपरि है, विशेष रूप से नक्सल क्षेत्रों जैसे संवेदनशील इलाकों में।
इस फैसले से स्पष्ट संकेत गया है कि सुरक्षा बलों की कठिन परिस्थितियों के बावजूद, कानून व्यवस्था और अनुशासन का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
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