
नारायणपुर में CPI का जोरदार प्रदर्शन, आठ सूत्रीय मांगों को लेकर उमड़ा जनसैलाब
नारायणपुर जिले में शुक्रवार का दिन राजनीतिक रंगों और नाराजगी के सुरों से भरा रहा। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के बैनर तले हजारों कार्यकर्ता अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे। शहर की गलियों में सुबह से ही लाल झंडों की गूंज सुनाई दी। महिलाएं, युवा और बुजुर्ग गांव-गांव से निकलकर शहर पहुंचे और हाई स्कूल मैदान में विशाल जनसभा के रूप में जुटे।
सभा में “वादे निभाओ, हक दिलाओ”, “खनिज की लूट बंद करो”, “आदिवासियों का शोषण बंद करो” जैसे नारे गूंजते रहे। CPI कार्यकर्ताओं का जुलूस कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ा, लेकिन पुलिस ने हाई स्कूल मैदान के पास ही बैरिकेडिंग कर रोक दिया। इससे कार्यकर्ताओं का गुस्सा और भड़क गया।
नेताओं का सरकार पर हमला
CPI जिला सचिव फूलसिंह कचलाम ने सभा को संबोधित करते हुए कहा:
नारायणपुर खनिज संपदा से भरा जिला है, लेकिन यहां के आदिवासी परिवार अब भी बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
सरकार कॉरपोरेट कंपनियों को अरबों का मुनाफा दे रही है, जबकि स्थानीय लोगों को शोषण और भूख मिल रही है।

उन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव में किए गए बीजेपी के वादों को याद दिलाया—जैसे पांच लाख वनाधिकार पट्टे, हर आदिवासी परिवार को दो बकरियां, 500 रुपये में गैस सिलेंडर, भ्रष्टाचार नियंत्रण आयोग, रावघाट परियोजना की डीएमएफ राशि का विकास पर सीधा खर्च—और आरोप लगाया कि अब तक कोई वादा पूरा नहीं हुआ।
अंजरेल खदान पर विशेष नाराजगी
सभा में वक्ताओं ने अंजरेल खदान की स्थिति को प्रमुखता से उठाया।
ग्रामीण धूल और शोर के बीच जीवन गुजार रहे हैं।
न मुआवजा मिला, न रोजगार।
गांवों में बिजली-पानी की भारी कमी है।
खनिज परिवहन का काम स्थानीय ट्रांसपोर्टरों से छीनकर बाहरी कंपनियों को सौंप दिया गया है।
कचलाम ने कहा कि निको जायसवाल और अन्य कंपनियां स्थानीयों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही हैं, जिससे लोग बेरोजगार होकर पलायन को मजबूर हैं।
आठ सूत्रीय मांगें
CPI ने सरकार के सामने आठ सूत्रीय मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख हैं:
1. आदिवासियों को खनिज से होने वाली आय का उचित हिस्सा।
2. प्रभावित गांवों को मुआवजा और रोजगार।
3. स्थानीय ट्रांसपोर्टरों को खनिज परिवहन में प्राथमिकता।
4. गांव-गांव में बिजली और पानी की आपूर्ति।
5. चुनावी वादों को तुरंत लागू करना।
6. भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए आयोग का गठन।
7. डीएमएफ राशि सीधे विकास कार्यों में खर्च करना।
8. कॉरपोरेट कंपनियों के मनमाने शोषण पर रोक।
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