
नमाज़ के लिए मजबूर करने के आरोपों पर प्रोफेसरों की याचिका खारिज
दिनांक: 27 मई 2025
स्थान: बिलासपुर, छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एनएसएस कैंप विवाद में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका की खारिज
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर की डिवीजन बेंच (मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति श्री राकेश मोहन पांडे) ने 27 मई 2025 को एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापकों सहित अन्य शिक्षकों द्वारा दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
यह मामला बिलासपुर जिले के कोटा क्षेत्र स्थित शिवतराई गाँव में मार्च 2025 में आयोजित एक राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) शिविर से संबंधित है, जहाँ छात्रों ने आरोप लगाया था कि उन्हें नमाज़ पढ़ने के लिए बाध्य किया गया। एफआईआर क्रमांक 417/2025 के अंतर्गत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 190, 196(1)(b), 197(1)(b), 197(1)(c), 299, 302 एवं छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 1968 की धारा 4 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
शिकायतकर्ताओं – आस्तिक साहू, आदर्श चतुर्वेदी और नवीन कुमार – का आरोप था कि हिन्दू होते हुए भी उन्हें नमाज़ पढ़ने को कहा गया। याचिकाकर्ता दिलीप झा एवं अन्य प्रोफेसरों की ओर से कोर्ट में यह तर्क दिया गया कि शिकायत देर से और राजनीतिक मंशा से प्रेरित थी। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि शिविर में 150 छात्र थे, जिनमें से केवल 3 ने शिकायत की।
हालांकि, राज्य सरकार के वकील ने आरोपों को गंभीर बताते हुए कहा कि जांच जारी है और गवाहों के बयान आरोपों की पुष्टि करते हैं। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के “नीहारिका इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाम महाराष्ट्र राज्य” के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि शुरुआती स्तर पर एफआईआर को रद्द करना कानून का उल्लंघन होगा, जब तक जांच पूरी न हो जाए।
अतः न्यायालय ने सभी याचिकाएं यह कहते हुए खारिज कर दीं कि अभी आरोपियों को अग्रिम जमानत मिली हुई है और जांच प्रक्रिया जारी है, जिसमें हस्तक्षेप उचित नहीं होगा।
रिपोर्ट: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय
स्रोत: सीआरएमपी नं. 1744/2025 व 1746/2025 — हाईकोर्ट आदेश दिनांक 27.05.2025
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