
मनरेगा योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा: फर्जी हाजिरी से लाखों का गबन, प्रशासन में हड़कंप
बिलासपुर जिले के मस्तूरी जनपद पंचायत में मनरेगा योजना के क्रियान्वयन में गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि पंचायत में पदस्थ एक ऑपरेटर फर्जी हाजिरी लगाकर मनरेगा से मजदूरी व सरकारी वेतन दोनों का लाभ उठा रहा है।

ग्राम हिरी निवासी ऑपरेटर पर आरोप
ग्राम हिरी निवासी दिनेश साहू वर्ष 2014 से जनपद पंचायत मस्तूरी में कलेक्टर दर पर फोटोकॉपी ऑपरेटर के पद पर कार्यरत है। वर्तमान में उसे प्रत्येक माह 16,670 रुपए वेतन मिलता है। नियमों के विपरीत उसे ‘आवक-जावक’ शाखा का प्रभार भी दिया गया है, जबकि यह जिम्मेदारी केवल नियमित कर्मचारियों को दी जा सकती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि दिनेश साहू ने अपने पिता भोंदूराम के नाम से बने मनरेगा जॉब कार्ड में भी फर्जी तरीके से अपना नाम जुड़वा लिया है। इसके बाद वह मजदूरी दर्ज करवाकर भुगतान हासिल कर रहा है।
फर्जी हाजिरी का खुलासा
ऑनलाइन रिकॉर्ड में यह पाया गया कि दिनेश साहू ने हाल ही में मनरेगा के तहत पांच दिनों की फर्जी हाजिरी लगाई थी। इसके एवज में उसे 850 रुपए की मजदूरी 7 सितंबर को सीधे बैंक खाते में जमा कर दी गई। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि वह न केवल अपने, बल्कि अपने पूरे परिवार के नाम पर फर्जी हाजिरी लगवाकर मजदूरी ले रहा है, जबकि परिवार का कोई सदस्य वास्तव में काम पर नहीं जाता।
शिकायत पर प्रशासन सख्त
ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की शिकायत सीधे कलेक्टर से की, जिसके बाद पंचायत स्तर पर हड़कंप मच गया है। प्रोग्राम ऑफिसर रुचि विश्वकर्मा ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कराई जाएगी। यदि पाया गया कि कलेक्टर दर पर काम कर रहे ऑपरेटर ने नियमों का उल्लंघन करते हुए मनरेगा मजदूरी ली है, तो दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

असर और सवाल
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इससे संकेत मिलता है कि मनरेगा योजना में गड़बड़ी और फर्जीवाड़ा बड़े पैमाने पर किया जा रहा हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गहन जांच की जाए तो कई और नाम सामने आ सकते हैं।
👉 हमारे WhatsApp channel से जुड़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें👇👇
https://whatsapp.com/channel/0029VbALQC677qVNwdR5Le3V



