
Mahasamund में फर्जी धान खरीदी मामला: 46 Lakh का घोटाला उजागर
छत्तीसगढ़। 1 अक्टूबर 2025। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में धान खरीदी प्रक्रिया के दौरान एक और बड़ा घोटाला सामने आया है। पिथौरा विकासखंड के थाना भड़ी धान खरीदी केंद्र सगुंडाप में फर्जी खरीदी के जरिए लगभग 46 लाख 94 हजार 640 रुपये का गबन किया गया। किसानों की शिकायत पर जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन स्थानीय किसान संगठनों ने तत्काल कार्रवाई की मांग की है। यह मामला धान उपार्जन सत्र 2024-25 के दौरान सामने आया है, जब किसानों ने केंद्र के दस्तावेजों की जांच की।

घटना का खुलासा कैसे हुआ?
घटना का पर्दाफाश चोटाला गांव के किसानों की एक सभा के दौरान हुआ। किसानों ने केंद्र के आय-व्यय खाते और धान खरीदी के रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की, जिसमें गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच में पाया गया कि केंद्र पर 1,514.40 क्विंटल धान की फर्जी खरीदी दर्ज की गई थी। प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 3,100 रुपये के हिसाब से यह राशि कुल 46 लाख 94 हजार 640 रुपये बनती है। किसानों का आरोप है कि यह धान कभी केंद्र पर पहुंचा ही नहीं, बल्कि कागजों में ही हेराफेरी कर भुगतान कर लिया गया।
किसान नेता नीलमणि पाल ने बताया, “हमने सभा में पाया कि केंद्र के रिकॉर्ड में फर्जी किसानों के नाम दर्ज हैं। असल में ये नाम गांव के बाहर के लोग हैं, जो कभी धान नहीं लाए। यह घोटाला न केवल किसानों का नुकसान है, बल्कि राज्य की धान खरीदी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।” पाल ने आगे कहा कि केंद्र पर पुराने बारदाने की कमी भी पाई गई, जो अतिरिक्त 2.57 लाख रुपये के घोटाले का संकेत देती है।

आरोपी कौन? मिलीभगत का आरोप
किसानों ने इस घोटाले में केंद्र के चेयरमैन मथमणी भड़ई, खरीदी प्रभारी हरिलाल साव और कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र प्रधान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि इन तीनों ने मिलीभगत से रिकॉर्ड में हेराफेरी की। चेयरमैन पर केंद्र की कमान संभालते हुए अनियमितताओं को छिपाने का आरोप है, जबकि प्रभारी और ऑपरेटर पर डेटा एंट्री में फर्जीवाड़ा करने का। किसानों का कहना है कि ये अधिकारी लंबे समय से केंद्र पर जमे हुए हैं, जिससे ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं।
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