
Maharashtra Police ने पुणे बिहार उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के खिलाफ दर्ज की FIR
पुणे, 26 अगस्त 2025: महाराष्ट्र पुलिस ने बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के खिलाफ सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित अपमानजनक और सामाजिक रूप से विभाजनकारी टिप्पणियों के मामले में एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई गडचिरोली पुलिस स्टेशन में हुई, जहां तेजस्वी यादव पर आरोप लगाया गया है कि उनकी टिप्पणियों ने समाज में नफरत और तनाव पैदा किया है।

घटना का विवरण
इस मामले में आरोप है कि तेजस्वी यादव ने अपने हालिया बयानों में, जो सामाजिक भवन को भड़काने वाले हैं, समाजिक सौहार्द को प्रभावित करने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, उनकी टिप्पणियां गडचिरोली क्षेत्र में तनाव का कारण बनीं, जिसके बाद स्थानीय अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एफआईआर दर्ज की। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तेजस्वी यादव ने अपने बयानों के माध्यम से न केवल प्रधानमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाया, बल्कि क्षेत्रीय शांति और सामाजिक एकता को भी खतरे में डाला।
पुलिस की जांच
पुलिस ने इस शिकायत पर गहनता से जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि तेजस्वी यादव के बयान राजनैतिक वाद-विवाद से परे जाकर समाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने वाले हैं। पुलिस ने इस मामले में उनकी टिप्पणियों को नफरत फैलाने वाला माना है और इसकी गहन जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है। यह टीम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनके बयानों का विश्लेषण कर रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि क्या उनके शब्दों ने किसी भी तरह की हिंसा या अशांति को बढ़ावा दिया।
राजनैतिक प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद राजनैतिक गलियारों में भारी हलचल मची हुई है। बिहार और महाराष्ट्र के राजनैतिक दलों ने इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय रखी है। कुछ दलों ने इसे तेजस्वी यादव के खिलाफ राजनीतिक साजिश करार दिया, जबकि दूसरी ओर कुछ दलों ने इसकी निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणियां देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा हैं। इस मामले ने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर बहस को जन्म दिया है, जिसमें कई नेता अपने-अपने पक्ष में बयान दे रहे हैं।

कानूनी पहलू
पुलिस ने इस मामले में तेजस्वी यादव के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की है। इसमें धारा 153A (धर्म, नस्ल, जन्म स्थान, निवास या समुदाय के आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देना) और धारा 505 (जनता के बीच शत्रुता को भड़काने वाली अफवाहें फैलाना) शामिल हैं। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर उनके बयानों की जांच के लिए साइबर सेल भी सक्रिय हो गई है। पुलिस का कहना है कि वे इस मामले की गहनता से जांच करेंगे और उचित कार्रवाई करेंगे।
समाजिक प्रभाव
यह मामला केवल राजनैतिक बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक समाजिक प्रभाव भी देखे जा रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों ने इस घटना की निंदा की है और मांग की है कि इस तरह की टिप्पणियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। दूसरी ओर, कुछ संगठनों का मानना है कि यह एक सुनियोजित साजिश है, जिसका उद्देश्य राजनैतिक लाभ लेना है। इस घटना ने जनता के बीच भी दोराहे पर खड़ा कर दिया है, जहां एक ओर लोग कानून के शासन की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजनैतिक स्वतंत्रता की मांग उठ रही है।
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