
महादेव ऑनलाइन सट्टा मामला: High Court का बड़ा फैसला, लंबित आपराधिक जांच के दौरान विभागीय कार्रवाई पर रोक
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर उच्च न्यायालय ने महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया कि जहां आपराधिक मामला लंबित है, वहां विभागीय जांच नहीं चलाई जा सकती। यह आदेश बिलासपुर पुलिस के सहायक उप निरीक्षक (ASI) चंद्रभूषण वर्मा के खिलाफ चल रही विभागीय जांच को रोकने के संबंध में आया है। ASI चंद्रभूषण वर्मा इस बड़े ऑनलाइन सट्टा घोटाले में आरोपी हैं और उनके खिलाफ ईडी-ईओडब्ल्यू द्वारा आपराधिक जांच जारी है।

कोर्ट का आदेश और मुख्य टिप्पणियां
11 जनवरी 2026 को जारी इस आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक जांच लंबित रहने के दौरान विभागीय कार्रवाई से आरोपी पर दोहरा दबाव पड़ता है और न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप होता है। कोर्ट ने विभागीय जांच को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि आपराधिक प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त होने और आरोपी के दोषी सिद्ध होने या मामले के निपटारे के बाद ही विभागीय जांच फिर से शुरू की जा सकती है।
यह फैसला न्यायिक निष्पक्षता और कानूनी प्रक्रिया की अखंडता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
ASI चंद्रभूषण वर्मा का मामला
ASI चंद्रभूषण वर्मा छत्तीसगढ़ पुलिस में पदस्थ थे। महादेव सट्टा ऐप मामले की जांच में ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उन्होंने महादेव बुक के प्रमोटर्स और दुबई स्थित संचालकों के बीच संपर्क सूत्र का काम किया, साथ ही पुलिस अधिकारियों और राजनेताओं तक ‘प्रोटेक्शन मनी’ पहुंचाने में भूमिका निभाई। इस मामले में वे लंबे समय से जांच के दायरे में हैं और आपराधिक प्रक्रिया चल रही है। विभाग ने इसी आधार पर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने रोक दिया है।
महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप घोटाले का संक्षिप्त पृष्ठभूमि
महादेव बुक ऐप देश का एक प्रमुख अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म था, जो क्रिकेट, घुड़दौड़, कबड्डी आदि खेलों पर दांव लगाने की सुविधा देता था। प्रमोटर्स सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल दुबई से इसका संचालन करते थे। इस घोटाले से हजारों करोड़ रुपये की कमाई हुई, जिसमें हवाला, मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के आरोप लगे। ईडी और ईओडब्ल्यू की जांच में कई पुलिसकर्मी, कारोबारी और अन्य शामिल पाए गए। मामले में कई FIR दर्ज हैं और जांच अब सीबीआई स्तर तक पहुंच चुकी है।
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