
मध्य प्रदेश में पेंट घोटाला: 4 लीटर पेंट के लिए 168 मजदूर, 65 मिस्त्री, 1.07 लाख का बिल; जांच के आदेश
जुलाई 07, 2025
अजब-गजब घोटाला सामने आया
मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक सरकारी स्कूल में मात्र 4 लीटर तेल पेंट लगाने के लिए 168 मजदूरों और 65 मिस्त्रियों को काम पर लगाने का दावा किया गया। इस काम के लिए 1,06,984 रुपये का बिल बनाया गया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस घोटाले की खबर ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है।
ब्यौहारी के स्कूलों में भ्रष्टाचार का खुलासा
यह मामला शहडोल जिले के ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र के सकंदी और निपनिया गांव के सरकारी स्कूलों से जुड़ा है। सकंदी के सरकारी हाई स्कूल में 4 लीटर पेंट के लिए 1.07 लाख रुपये और निपनिया के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 20 लीटर पेंट, 10 खिड़कियां और चार दरवाजे स्थापित करने के लिए 2.31 लाख रुपये का बिल बनाया गया। बिल में दावा किया गया कि निपनिया में 275 मजदूरों और 150 मिस्त्रियों ने काम किया।

सोशल मीडिया पर वायरल बिल, जनता में आक्रोश
सोशल मीडिया पर इन बिलों के वायरल होने के बाद जनता में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि इतने कम काम के लिए इतनी बड़ी संख्या में मजदूरों और मिस्त्रियों की नियुक्ति कैसे संभव है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मजदूरों की संख्या भी इतनी नहीं है, जितनी बिलों में दर्शाई गई है। यह मामला भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण बन गया है।
जांच के आदेश, होगी सख्त कार्रवाई
शहडोल के जिला कलेक्टर केदार सिंह ने इस मामले में उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) से विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि दोनों स्कूलों में काम न के बराबर हुआ और वह भी खराब गुणवत्ता का था। जिला शिक्षा अधिकारी फूल सिंह मरपाची को नोटिस जारी किया गया है, और स्कूलों के प्राचार्यों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया गया है। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने भी इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष जांच के लिए शिक्षा विभाग के सचिव और जन शिक्षण आयुक्त को निर्देश दिए हैं।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति
मध्य प्रदेश सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक संस्थानों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रति सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इस घोटाले ने ग्रामीण शिक्षा अवसंरचना में धन के उपयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं, और लोग मजबूत जवाबदेही तंत्र की मांग कर रहे हैं।
आगे क्या?
जिला कलेक्टर ने शहडोल जिले के सभी सरकारी स्कूलों में हाल के निर्माण और रखरखाव कार्यों की गहन जांच के आदेश दिए हैं। भुगतान की प्रक्रिया और कार्य की गुणवत्ता की समीक्षा की जाएगी। इस मामले ने न केवल प्रशासनिक खामियों को उजागर किया है, बल्कि शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को भी रेखांकित किया है।
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