
मध्य प्रदेश में 34 करोड़ रुपये के कोयला घोटाले में प्रमुख सहयोगी गिरफ्तार
घोटाले का खुलासा और गिरफ्तारी
जबलपुर, 4 जुलाई 2025: मध्य प्रदेश में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने 34 करोड़ रुपये के कोयला घोटाले के सिलसिले में एक बड़े ऑपरेशन में प्रमुख सहयोगी को गिरफ्तार किया है। यह घोटाला कोयले की आपूर्ति और बिलिंग में फर्जीवाड़े से जुड़ा है, जिसने राज्य सरकार को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया।
गिरफ्तार सहयोगी की पहचान
जांच एजेंसी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए प्रमुख सहयोगी की पहचान विनोद कुमार सहाय उर्फ एनके खरे के रूप में हुई है। उसे झारखंड की राजधानी रांची से गिरफ्तार किया गया और शुक्रवार को जबलपुर की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 2 जुलाई तक रिमांड पर भेज दिया गया।
फर्जी कंपनियों का जाल
ईओडब्ल्यू के महानिदेशक उपेंद्र जैन ने बताया कि खरे ने ग्रामीणों के आधार कार्ड, पैन कार्ड, और अन्य दस्तावेजों का दुरुपयोग कर चार फर्जी कंपनियां बनाई थीं। इन फर्जी फर्मों के जरिए फर्जी बिलिंग और कोयले की आपूर्ति में हेराफेरी कर 33.80 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हासिल किया गया। इस घोटाले ने जीएसटी प्रक्रिया में गंभीर खामियों को उजागर किया है।
दस्तावेजों का दुरुपयोग

जांच में सामने आया कि खरे ने भोपाल, जबलपुर, और इंदौर के ग्रामीण इलाकों में लोगों को लोन दिलाने का झांसा देकर उनके दस्तावेज एकत्र किए। इन दस्तावेजों का उपयोग कर उसने फर्जी फर्में रजिस्टर कीं, जिनके जरिए कोई वास्तविक कारोबार नहीं हुआ, बल्कि केवल फर्जी बिलिंग के माध्यम से टैक्स चोरी की गई।
घोटाले का दायरा और भविष्य की जांच
ईओडब्ल्यू का कहना है कि यह घोटाला मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, और महाराष्ट्र तक फैला हुआ है। जांच के दौरान कई और बड़े नामों के सामने आने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, रिमांड के दौरान पूछताछ में इस घोटाले से जुड़े और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
इस मामले ने राज्य में कोयला व्यापार और जीएसटी प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के संगठित अपराधों पर नकेल कसने के लिए और सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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