
Korba कोयला ब्लॉक खोलने का जमकर विरोध: पर्यावरण पर मंडरा रहा खतरा, ग्रामीणों ने दी चेतावनी
कोरबा, छत्तीसगढ़ | 7 अक्टूबर 2025
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में कोयला खनन के खिलाफ ग्रामीणों का आंदोलन तेज हो गया है। मंगलवार को राजपाटी और राजयपाल के नाम से जाना जाने वाला कोयला ब्लॉक खोलने के प्रस्ताव के विरुद्ध सैकड़ों ग्रामीणों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि इस खनन से न केवल जंगलों का विनाश होगा, बल्कि स्थानीय पर्यावरण, जल स्रोतों और आदिवासी समुदायों की आजीविका पर गहरा असर पड़ेगा। प्रदर्शनकारियों ने निजी कंपनी के अधिकारियों को धमकी दी है कि यदि खनन कार्य शुरू किया गया, तो वे इसे रोकने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

ग्रामीणों का गुस्सा: जंगल और नदियों का संरक्षण पहली प्राथमिकता
कोरबा जिला, जो ‘पावर हब’ के नाम से जाना जाता है, पहले से ही कोयला खनन और थर्मल पावर प्लांट्स के कारण प्रदूषण की चपेट में है। यहां हसदोंगरी, पाली और कटघोरा जैसे इलाकों में जंगलों की घनघोर हरियाली है, जो स्थानीय आदिवासी समुदायों के लिए जीवनरेखा बनी हुई है। प्रदर्शन का केंद्र बिंदु राजपाटी कोयला ब्लॉक है, जहां बंगाल आधारित प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ‘परिषम माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड’ को खनन का ठेका दिया गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस ब्लॉक में लगभग 725 मिलियन टन कोयले का अनुमानित भंडार है, जो निजी कंपनी द्वारा निकाला जाएगा।

ग्रामीण नेता शंकर सिंह ने ‘”हमारा गांव जंगलों से घिरा हुआ है। यहां महुआ, तेंदू पत्ता और अन्य वन उत्पादों से हमारी आजीविका चलती है। यदि यह ब्लॉक खुला, तो हजारों पेड़ कट जाएंगे और हमारी नदियां—जैसे हसदों नाला—कोयले के कचरे से प्रदूषित हो जाएंगी। सरकार ने हमें बिना सलाह के यह फैसला थोपा है। हम पर्यावरण मंत्रालय से अपील करते हैं कि इस पर तत्काल रोक लगाई जाए।”
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