
कोरबा: दंतैल हाथी ने तौलीपाली और कुदमुरा में मचाई तबाही
कोरबा: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के तौलीपाली और कुदमुरा गांवों में एक दंतैल हाथी ने मंगलवार सुबह लगभग 4:30 बजे बस्तियों में घुसकर जमकर उत्पात मचाया। इस दौरान हाथी ने तीन कच्चे मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया और घरों में रखे धान और प्याज की बोरियों को नष्ट कर दिया। इस घटना से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है, और वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ाने की बात कही है।
तौलीपाली में शुरू हुआ कहर
हाथी ने सबसे पहले तौलीपाली गांव में बालक राम राठिया के घर को निशाना बनाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हाथी ने सूंड से एक बोरी धान और एक कट्टी प्याज को उठाकर दूर ले गया, जहां उसने उसे खाया और बर्बाद कर दिया। उस समय बिजली गुल होने के कारण गांव अंधेरे में डूबा था, जिससे ग्रामीणों को हाथी की गतिविधियों का पता लगाने में कठिनाई हुई। इस हमले ने स्थानीय लोगों में भय पैदा कर दिया।
कुदमुरा में मकानों को नुकसान
तौलीपाली के बाद हाथी कुदमुरा गांव पहुंचा, जहां उसने मनमोहन राठिया और पुनी राम घनुहार के घरों की दीवारों को तोड़ दिया। इन घरों में रखे दो-तीन बोरी धान को भी हाथी ने रौंदकर और खाकर नष्ट कर दिया। ग्रामीणों ने बताया कि हाथी के इस उत्पात ने उनकी मेहनत से कमाए अनाज को बर्बाद कर दिया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा है।
वन विभाग की कार्रवाई
वन विभाग की टीम ने घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर हाथी को जंगल की ओर खदेड़ने की कोशिश की। विभाग के अनुसार, कोरबा जिले में 46 हाथियों का एक झुंड स्थायी रूप से विचरण कर रहा है, जिसके कारण ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं। ग्रामीणों को सतर्क रहने और जंगल क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी गई है। विभाग ने मुआवजे की प्रक्रिया शुरू करने का भी आश्वासन दिया है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती
कोरबा जिले में पिछले ढाई दशकों से हाथियों की आवाजाही बढ़ी है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर समस्या बन गया है। वन विभाग का कहना है कि जंगलों में पानी और भोजन की कमी के कारण हाथी बस्तियों की ओर आ रहे हैं। ग्रामीणों ने स्थायी समाधान, जैसे सुरक्षित कॉरिडोर और मुआवजे की त्वरित व्यवस्था, की मांग की है।
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