
Kolkata : समस्तीपुर जिले के पुलिस ने राजीव रंजन को किया गिरफ्तार,4.49 करोड़ की ठगी का आरोप
समस्तीपुर जिले के टभका गांव के निवासी राजीव रंजन, जो एक प्रमुख बिल्डर के साथ-साथ लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सक्रिय नेता हैं, को कोलकाता पुलिस ने हाल ही में गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी एक बड़े वित्तीय घोटाले से जुड़ी है, जिसमें उन पर रिटायर्ड जज इंद्रजीत चटर्जी से 4.49 करोड़ रुपये की ठगी का गंभीर आरोप लगाया गया है। राजीव रंजन विभूतिपुर विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने के प्रबल दावेदार थे, लेकिन यह घटना उनके राजनीतिक भविष्य पर सवालिया निशान लगा सकती है। आइए इस मामले की पूरी जानकारी को विस्तार से समझते हैं।

आरोपी का पृष्ठभूमि: बिल्डर से राजनेता तक
राजीव रंजन समस्तीपुर जिले के टभका गांव के रहने वाले हैं, जो एक सामान्य पृष्ठभूमि से निकलकर बिल्डिंग निर्माण के क्षेत्र में सफलता हासिल करने वाले उद्यमी हैं। उनकी कंपनी न केवल कोलकाता में, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में बड़े-बड़े निर्माण कार्यों में सक्रिय है। यह कंपनी आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं पर फोकस करती है, जिसके कारण राजीव रंजन को स्थानीय स्तर पर एक प्रभावशाली व्यवसायी के रूप में जाना जाता है।
राजनीतिक रूप से, वे लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से जुड़े हुए हैं, जो बिहार की राजनीति में दलित और पिछड़े वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक महत्वपूर्ण पार्टी है। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने विभूतिपुर विधानसभा सीट से पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था, हालांकि सफलता नहीं मिली। वर्तमान में, वे आगामी चुनावों के लिए विभूतिपुर सीट से टिकट के मजबूत दावेदार माने जा रहे थे। पार्टी के अंदरूनी सर्कल में उनकी सक्रियता और फंडिंग क्षमता के कारण उन्हें एक महत्वपूर्ण चेहरा माना जाता था। लेकिन यह गिरफ्तारी उनके राजनीतिक करियर को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।

ठगी का मामला: रिटायर्ड जज इंद्रजीत चटर्जी का शिकार
यह मामला एक कथित निवेश घोटाले से जुड़ा है, जिसमें राजीव रंजन पर रिटायर्ड जज इंद्रजीत चटर्जी को 4.49 करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोप है। इंद्रजीत चटर्जी कोलकाता हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश हैं, जिन्होंने अपने रिटायरमेंट के बाद विभिन्न निवेश अवसरों में रुचि दिखाई थी। आरोप के अनुसार, राजीव रंजन ने जज को अपनी कंपनी के निर्माण प्रोजेक्ट्स में निवेश करने के बहाने लुभाया। उन्होंने आकर्षक रिटर्न का वादा किया, जैसे कि उच्च ब्याज दरें और संपत्ति में हिस्सेदारी, लेकिन निवेश की गई राशि का कोई हिसाब-किताब नहीं दिया गया।
शिकायत के मुताबिक, जज ने कुल 4.49 करोड़ रुपये राजीव रंजन की कंपनी को विभिन्न किश्तों में ट्रांसफर किए थे। इसमें से कुछ राशि निर्माण कार्यों के नाम पर ली गई, जबकि बाकी को ‘सुरक्षित निवेश’ के रूप में पेश किया गया। लेकिन समय आने पर न तो रिटर्न मिला और न ही मूल राशि की वापसी हुई। राजीव रंजन ने कथित तौर पर दस्तावेजों और वादों के साथ जज को भरोसा दिलाया, लेकिन सब कुछ एक सुनियोजित धोखाधड़ी साबित हुआ। यह मामला धोखाधड़ी, विश्वासघात और आपराधिक षड्यंत्र के तहत दर्ज किया गया है।
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