
खाद संकट पर कृषि विभाग की सख्ती, कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी दल गठित
दुर्ग: वैश्विक परिस्थितियों के कारण दुर्ग जिले में खाद की कमी के बीच कालाबाजारी और मुनाफाखोरी की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कृषि विभाग ने कड़ा कदम उठाया है। विभाग ने निगरानी दल का गठन किया है और एक मोबाइल नंबर जारी किया है, जिस पर कोई भी व्यक्ति कालाबाजारी, मुनाफाखोरी या अधिक कीमत पर खाद बिक्री की शिकायत दर्ज कर सकता है। कृषि विभाग का दावा है कि शिकायत मिलने पर त्वरित जांच और कार्रवाई की जाएगी।
खरीफ बुआई में तेजी, DAP की कमी
जिले में बारिश के बाद खरीफ फसलों की बुआई जोरों पर है। इस दौरान किसानों को फास्फोरस और पोटेशियम जैसे तत्वों की जरूरत होती है, जिसके लिए डीएपी खाद का उपयोग किया जाता है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर डीएपी की आपूर्ति में कमी के कारण प्रदेश में इसका संकट गहराया है। इस वजह से डीएपी के भंडारण का लक्ष्य आधा कर दिया गया है। सहकारी समितियों में उपलब्ध डीएपी का 94 फीसदी से अधिक हिस्सा किसानों ने पहले ही उठा लिया है।
निजी दुकानों पर कालाबाजारी की शिकायत
सहकारी समितियों में डीएपी का स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है, जिसके कारण किसान निजी दुकानों पर निर्भर हैं। लेकिन निजी दुकानों पर डीएपी की अधिक कीमत वसूलने और गैर-जरूरी सामान खरीदने की बाध्यता की शिकायतें सामने आ रही हैं। बाकी बचे 6 फीसदी डीएपी का स्टॉक भी निजी प्रतिष्ठानों के पास बताया जा रहा है।
खाद वितरण की स्थिति
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में विभिन्न खादों का भंडारण और वितरण इस प्रकार है (मेट्रिक टन में):
यूरिया: भंडारण 27,600, वितरण 20,729
सिंगल सुपर फास्फेट: भंडारण 18,320, वितरण 14,253
पोटाश: भंडारण 5,700, वितरण 5,293
कुल: भंडारण 78,027, वितरण 53,238
निगरानी के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित
कृषि आदान सामग्री की निगरानी के लिए जिला स्तर पर एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। उप संचालक कृषि संदीप भोई ने बताया कि सहायक संचालक सुमन कुमार कोरराम को जिला नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा सहायक नोडल अधिकारियों में मध्यवर्ती सहायक सांख्यिकी अधिकारी अमित जोशी, संपदा लहरे, अनिल बन्द्राकर , निशा सिंह, पूनम चन्द्राकर और मुख्य नोडल शामिल हैं।
वैकल्पिक खाद का उपयोग करने की सलाह
डीएपी की कमी को देखते हुए कृषि विभाग किसानों को वैकल्पिक खादों का उपयोग करने की सलाह दे रहा है। अधिकारियों का कहना है कि लगातार डीएपी के उपयोग से मिट्टी की अम्लीयता बढ़ती है, जिसका लंबे समय में फसल उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विभाग किसानों को वैकल्पिक खादों के उपयोग के लिए जागरूक कर रहा है।
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