
केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को मंजूरी: रामगढ़-लेमरू प्रोजेक्ट पर खतरा
पर्यावरणीय चिंताएं और सिंहदेव की प्रतिक्रिया
छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र में केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को मंजूरी मिलने से पर्यावरणविदों और स्थानीय नेताओं में हलचल मच गई है। पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने इस मंजूरी को रामगढ़-लेमरू हाथी रिजर्व प्रोजेक्ट के लिए खतरा बताया है। नए पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन (EIA) रिपोर्ट में कोल ब्लॉक और रामगढ़-लेमरू प्रोजेक्ट के बीच की दूरी को पहले की तुलना में कम बताया गया है, जिससे क्षेत्र के जैव-विविधता और वन्यजीवों पर खतरा बढ़ गया है। सिंहदेव ने कहा कि यह मंजूरी न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएगी, बल्कि आदिवासी समुदायों के जीवन को भी प्रभावित करेगी।
जंगल कटाई का खतरा

रिपोर्ट्स के अनुसार, केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक 1760 हेक्टेयर में फैला है, जिसमें 1742 हेक्टेयर घना जंगल है। इस क्षेत्र में खनन की अनुमति से लगभग 6 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई हो सकती है। यह न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट करेगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई को भी कमजोर करेगा। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस मंजूरी को “आपदा” करार दिया है और इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
सरकार और उद्योग का रवैया
हसदेव क्षेत्र में कोयला खनन की अनुमति को लेकर छत्तीसगढ़ और राजस्थान सरकार के बीच मतभेद सामने आए हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कोयला आपूर्ति के लिए यह कदम जरूरी है, जबकि छत्तीसगढ़ में स्थानीय नेताओं ने इसका विरोध किया है। सिंहदेव ने केंद्र और राज्य सरकार से इस मंजूरी को रद्द करने की अपील की है, ताकि रामगढ़-लेमरू प्रोजेक्ट को बचाया जा सके।
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