
केंद्र सरकार ने नौ महीने की गर्भवती सुनाली खातून और उसके 8 साल के बच्चे को वापस बुलाया Supreme Court ने जताई सख़्त नाराज़गी
डिपोर्ट किए जाने के मामले ने उठाए गंभीर सवाल
नौ महीने की गर्भवती सुनाली खातून और उसके 8 वर्षीय बेटे को हाल ही में सीमा पार भेजे जाने के मामले ने देशभर में चिंता बढ़ा दी थी। महिला की स्थिति को देखते हुए सामाजिक संगठनों और वकीलों ने इसे गंभीर मानवीय मुद्दा बताया।
केंद्र सरकार ने की हस्तक्षेप, मां-बेटा लौटे
मामला उजागर होने के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए दोनों को पड़ोसी देश से वापस भारत लाया। अधिकारियों ने स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए महिला के लिए तुरंत चिकित्सकीय सुविधाओं की व्यवस्था की है।

Supreme Court of India ने जताई कड़ी आपत्ति
इस घटना पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और संबंधित एजेंसियों से सख़्त लहजे में पूछा कि नौ महीने की गर्भवती महिला को किन परिस्थितियों में सीमा पार भेजा गया। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसी कार्रवाई न केवल अमानवीय है बल्कि संवैधानिक मूल्यों के भी खिलाफ है।

CJI ने कहा—“गर्भवती महिला का सुरक्षा अधिकार सर्वोपरि”
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी भी महिला—खासकर गर्भवती—के साथ ऐसी प्रशासनिक कार्रवाई अस्वीकार्य है। अदालत ने जोर देकर कहा कि अधिकारियों को भविष्य में संवेदनशील मामलों में अत्यधिक सतर्कता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना होगा।
जांच के आदेश, जिम्मेदारी तय होगी
अदालत ने केंद्र से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है कि यह स्थिति कैसे उत्पन्न हुई और किस स्तर पर चूक हुई। शीर्ष अदालत ने साफ किया कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तय होगी।
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