
केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: 3% DA वृद्धि, 49 Lakh कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनरों को लाभ
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2025: दिवाली और दशहरा के त्योहारों से ठीक पहले केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में महंगाई भत्ता (डीए) में 3 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले से कुल डीए की दर 55 प्रतिशत से बढ़कर 58 प्रतिशत हो गई है। यह बढ़ोतरी 1 जुलाई 2025 से प्रभावी मानी जाएगी, जिसका मतलब है कि कर्मचारियों को जुलाई से सितंबर तक के तीन महीनों का एरियर (बकाया) अक्टूबर के वेतन के साथ मिलेगा।

यह फैसला लगभग 1.16 करोड़ केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए वरदान साबित होगा, जिनमें करीब 48 लाख कर्मचारी और 68 लाख पेंशनभोगी शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस वृद्धि से न्यूनतम वेतन पाने वाले कर्मचारियों की मासिक आय में औसतन 540 रुपये का इजाफा होगा, जबकि उच्च वेतन वर्ग के लिए यह राशि हजारों रुपये तक पहुंच सकती है। कुल मिलाकर, यह कदम मुद्रास्फीति की मार से जूझ रहे सरकारी नौकरशाहों को राहत प्रदान करेगा और उनके जीवन स्तर को मजबूत बनाएगा।
डीए वृद्धि का आधार और गणना
महंगाई भत्ता (डीए) केंद्रीय कर्मचारियों के मूल वेतन का एक हिस्सा होता है, जो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आधार पर तय किया जाता है। यह भत्ता बढ़ती महंगाई के कारण जीवन-यापन की लागत को संतुलित करने के लिए दिया जाता है। सातवें केंद्रीय वेतन आयोग (7वीं वेतन आयोग) की सिफारिशों के अनुसार, डीए की समीक्षा साल में दो बार की जाती है—जनवरी और जुलाई में। इस बार की वृद्धि भी इसी फॉर्मूले पर आधारित है, जिसमें औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI) की गणना शामिल है।

पिछली वृद्धि मार्च 2025 में हुई थी, जब डीए को 2 प्रतिशत बढ़ाकर 55 प्रतिशत किया गया था। वह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2025 से लागू हुई थी। अब यह 3 प्रतिशत की छलांग 7वीं वेतन आयोग के तहत अंतिम प्रमुख संशोधन के रूप में दर्ज हो गई है। आठवें वेतन आयोग (8वीं वेतन आयोग) की चर्चा जोरों पर है, जिसकी रिपोर्ट 2026 में आने की संभावना है, और इससे वेतन संरचना में व्यापक बदलाव की उम्मीद है।
वित्तीय प्रभाव: सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ
इस डीए वृद्धि से केंद्र सरकार के खजाने पर सालाना लगभग 10,084 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। हालांकि, यह राशि आर्थिक विकास और राजस्व वृद्धि के संदर्भ में प्रबंधनीय मानी जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कैबिनेट बैठक के बाद कहा, “यह फैसला हमारे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए लिया गया है। त्योहारों के मौसम में यह तोहफा उनकी मेहनत का सम्मान है।” इस वृद्धि से न केवल कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ेगी, बल्कि यह उपभोक्ता व्यय को भी प्रोत्साहित कर अर्थव्यवस्था को गति देगी।
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