
केंद्र सरकार में Transfer होने पर Gratuity मिलेगी या नहीं? कर्मचारियों में उठा असमंजस
केंद्र सरकार के विभागों में बाहर से ट्रांसफर होकर आने वाले कर्मचारियों में ग्रेच्युटी को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। खासतौर पर वे कर्मचारी जो राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के तहत स्वायत्त निकायों से इस्तीफा देकर केंद्र में आते हैं, उनके लिए केंद्र सरकार के ग्रेच्युटी नियम अपने आप लागू नहीं होते हैं। इस पर सरकार ने हाल ही में स्पष्टता दी है।

स्वायत्त निकायों पर नियमों का प्रभाव
कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में सांसद सुमित्रा बाल्मिक के प्रश्न के उत्तर में बताया कि केंद्र सरकार ने Central Civil Services (Payment of Gratuity under National Pension System) Rules, 2021 अधिसूचित किए हैं, लेकिन ये नियम स्वायत्त निकायों के कर्मचारियों पर सीधे लागू नहीं होते।
ग्रेच्युटी प्राप्ति की शर्तें
- यदि कोई कर्मचारी स्वायत्त निकाय से NPS के तहत केंद्र सरकार में आता है और उसने सही प्रक्रिया से इस्तीफा दिया है तो उसकी पिछली सेवा को केंद्र सरकार में ग्रेच्युटी के लिए जोड़ा जा सकता है।
- यह तभी संभव है जब संबंधित स्वायत्त निकाय अपने कर्मचारियों को केंद्र सरकार जैसी ग्रेच्युटी सुविधा प्रदान करता हो।
- यदि स्वायत्त निकाय ग्रेच्युटी नहीं देता या देरी करता है, तो कर्मचारी को पिछली सेवा की ग्रेच्युटी नहीं मिलेगी या उस पर ब्याज नहीं मिलेगा।
ग्रेच्युटी की न्यूनतम सेवा अवधि और नियम
- ग्रेच्युटी के लिए कम से कम 4 वर्ष 9 महीने की सेवा अनिवार्य है।
- इस सेवा अवधि को ग्रेच्युटी के लिए मान्य किया जाएगा या नहीं, यह संबंधित स्वायत्त निकाय के नियमों, अधिनियमों या न्यायालय के फैसलों पर निर्भर करता है।
- केंद्र सरकार ने इस संबंध में कोई समेकित या एकसमान नियम लागू नहीं किए हैं।

विशेषज्ञों की राय: एकसमान नीति की आवश्यकता
विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति से कर्मचारियों को विविध निकायों के अलग-अलग नियमों के कारण परेशानी होती है। इससे दूर करने और नीतियों में सामंजस्य स्थापित करने के लिए एक समेकित और स्पष्ट ग्रेच्युटी नीति बनाना आवश्यक है।
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