
J&K: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने लश्कर-ए-तैयबा से संबंधों के कारण दो सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को कुपवाड़ा जिले के दो सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दीं, जिनके प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध होने का आरोप है। यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 311 (2) (सी) के तहत की गई, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में बिना जांच के बर्खास्तगी की अनुमति देता है।
कर्मचारियों की पहचान और आरोप
बर्खास्त किए गए कर्मचारियों की पहचान खुर्शीद अहमद राथर और सियाद अहमद खान के रूप में हुई है। खुर्शीद अहमद राथर कर्णाह में एक शिक्षक के रूप में कार्यरत थे, जबकि सियाद अहमद खान केरन में भेड़ पालन विभाग में सहायक स्टॉकमैन थे। जांच में पाया गया कि दोनों कर्मचारी लश्कर-ए-तैयबा के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे थे। खुर्शीद पर पाकिस्तान स्थित आतंकी हैंडलर्स के निर्देश पर हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थों की तस्करी करने का आरोप है। वहीं, सियाद पर आतंकियों को शरण देने, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी में सहायता करने का आरोप है। दोनों को 2024 में गिरफ्तार किया गया था और वर्तमान में वे कुपवाड़ा जिला जेल में बंद हैं।

आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकवाद और इसके समर्थन तंत्र के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। उनके कार्यकाल में, जो अगस्त 2020 में शुरू हुआ, अब तक 85 सरकारी कर्मचारियों को आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता के कारण बर्खास्त किया जा चुका है। यह कार्रवाई आतंकवादियों और उनके समर्थकों, विशेष रूप से सरकारी संस्थानों में मौजूद ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को खत्म करने की रणनीति का हिस्सा है। सिन्हा ने हाल ही में एक सुरक्षा समीक्षा बैठक में आतंकवादियों और उनके समर्थकों को पूरी तरह से समाप्त करने का संकल्प दोहराया था।

पहले भी हुई कार्रवाई
इस वर्ष जून में, उपराज्यपाल सिन्हा ने लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों से संबंध रखने के आरोप में तीन अन्य सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया था। इनमें एक पुलिस कांस्टेबल, एक स्कूल शिक्षक और स्वास्थ्य शिक्षा विभाग में एक सहायक शामिल थे। 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने आतंकी नेटवर्क को कमजोर करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं, जिसमें 75 से अधिक कर्मचारियों की बर्खास्तगी शामिल है।
पहलगाम हमले के बाद बढ़ी सतर्कता
यह कार्रवाई हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद आई है, जिसमें 26 नागरिकों, मुख्य रूप से पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी। इस हमले के बाद सुरक्षा बलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया और पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में नौ आतंकी लॉन्च पैड्स पर सटीक हमले किए। उपराज्यपाल की यह कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ चल रही व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें सक्रिय आतंकियों के साथ-साथ उनके समर्थन नेटवर्क को निशाना बनाया जा रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता
अधिकारियों ने बताया कि इन कर्मचारियों की गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा थीं। खुर्शीद और सियाद जैसे व्यक्तियों ने सरकारी नौकरी का दुरुपयोग करते हुए आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दिया। जांच में यह भी पता चला कि ये कर्मचारी पाकिस्तान स्थित आतंकी हैंडलर्स के संपर्क में थे, जो उन्हें हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए निर्देश देते थे। उपराज्यपाल सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि सरकारी तंत्र में आतंकवाद के समर्थकों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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