
Jindal कोल माइंस पर ग्रामीणों का आक्रोश: Raigarh में लोक सुनवाई का विरोध
रायगढ़, 29 सितंबर 2025 छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (JSPL) द्वारा प्रस्तावित भूमिगत कोल माइंस परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। आज सैकड़ों ग्रामीणों ने तमनार क्षेत्र के प्रभावित गांवों से एक विशाल रैली निकालकर जिला मुख्यालय पहुंचे और लोक सुनवाई को तत्काल निरस्त करने की मांग की। ग्रामीणों ने साफ लहजे में कहा कि वे अपनी सरकारी, निजी और वनभूमि को किसी भी सूरत में कोयला खदान के लिए नहीं देंगे। यह विरोध न केवल पर्यावरणीय चिंताओं से जुड़ा है, बल्कि स्थानीय आदिवासी समुदायों की आजीविका और सांस्कृतिक विरासत को बचाने की लड़ाई का प्रतीक बन चुका है।

रैली का आयोजन ‘कोयला सत्याग्रह समिति’ के बैनर तले किया गया था, जिसमें लालपुर, उरवा, पेलमा, सक्ता, जरहीडीह समेत करीब 20 गांवों के निवासी शामिल हुए। सुबह 10 बजे तमनार ब्लॉक के गारे-पेलमा सेक्टर-1 से शुरू हुई यह रैली दोपहर तक जिला कलेक्टरेट पहुंची। ग्रामीणों ने नारे लगाते हुए कहा, “जिंदल की खदान बंद करो, जंगल-जमीन बचाओ!” और “लोक सुनवाई का ढोंग बंद करो!” रैली में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग सभी शामिल थे, जो पारंपरिक वेशभूषा में सजकर प्रदर्शन कर रहे थे। एक ग्रामीण नेता, रामेश्वर सिद्धार, ने बताया, “यह खदान हमारी जमीन, पानी और हवा को तबाह कर देगी। हमारी पीढ़ियों से चली आ रही खेती और जंगल नष्ट हो जाएंगे। ग्राम सभा की सहमति के बिना कोई सर्वे या सुनवाई नहीं चलेगी।”
परियोजना का पृष्ठभूमि: पुराना विवाद, नई शुरुआत
जिंदल कोल माइंस परियोजना 2010 से विवादों में घिरी हुई है। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) द्वारा तमनार क्षेत्र में आवंटित इस कोल ब्लॉक को JSPL ने लीज पर लिया है। प्रस्तावित भूमिगत खदान से लगभग 14 से अधिक गांव प्रभावित होंगे, जहां कुल 110 एकड़ से ज्यादा रैयती भूमि अधिग्रहित करने की योजना है। जिला प्रशासन ने हाल ही में लोक सुनवाई की तारीख तय की थी, लेकिन ग्रामीणों ने इसे “ढोंग” करार देते हुए विरोध शुरू कर दिया। पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद यह सुनवाई अनिवार्य हो गई है, लेकिन 5वीं अनुसूची वाले इस आदिवासी क्षेत्र में ग्राम सभा की पूर्व अनुमति के बिना कोई कार्रवाई संभव नहीं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी ने बिना स्थानीय सहमति के भूमि सर्वे की कोशिश की, जिसके चलते अप्रैल 2023 में राजस्व टीम को गांव वालों ने भगा दिया था।489c87 उसी तरह, आज की रैली में भी ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा, जिसमें लोक सुनवाई रद्द करने के साथ-साथ परियोजना पूरी तरह बंद करने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया है कि खदान से भूजल स्तर गिरेगा, वन क्षेत्र नष्ट होगा और प्रदूषण से स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ेंगी। एक स्थानीय किसान, लक्ष्मी देवी, ने भावुक होकर कहा, “हमारी जमीन हमारी मां है। जिंदल इसे लूट लेगा तो हम भूखे मर जाएंगे। सरकार आदिवासियों की रक्षा करे।”
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