
झोलाछाप Doctor की गलत सलाह से मरीज की जान पर बनी आफत: गुप्तांग में अंगूठी फंसने से सूजन, एक सप्ताह तक दर्द की मार
नारायणपुर, छत्तीसगढ़
नारायणपुर। ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों की मनमानी और अज्ञानता से मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाना कोई नई बात नहीं है। लेकिन बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले में हाल ही में घटी एक घटना ने इस समस्या की गंभीरता को फिर से उजागर कर दिया है। एक साधारण मरीज अपनी मामूली शिकायत लेकर एक झोलाछाप डॉक्टर के पास पहुंचा, लेकिन उसकी दी गई अजीबोगरीब सलाह ने मरीज की जिंदगी को नर्क बना दिया। यह मामला न केवल चिकित्सा की अनदेखी को दर्शाता है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों को भी सामने लाता है, जहां योग्य डॉक्टरों की कमी और अंधविश्वास की जड़ें गहरी हैं।

दरअसल, ओड़छा क्षेत्र के जाटलूर गांव के 35 वर्षीय किसान रामलाल (काल्पनिक नाम, गोपनीयता के लिए) को करीब एक हफ्ते पहले पेशाब में जलन, बुखार और सिरदर्द की शिकायत शुरू हुई थी। गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी होने के कारण, रामलाल ने स्थानीय झोलाछाप डॉक्टर से संपर्क किया, जो खुद को ‘वैद्य’ बताता है और बिना किसी मेडिकल डिग्री के दवाइयां और सलाह देता है। इस झोलाछाप ने मरीज की जांच करने के बजाय एक अजीबोगरीब उपाय सुझाया – गुप्तांग (लिंग) पर एक धातु की अंगूठी पहनने की। उसने दावा किया कि यह पुरानी ‘देसी’ विधि है, जो जलन और बुखार को तुरंत दूर कर देगी। अंधविश्वास और इलाज की उम्मीद में रामलाल ने यह सलाह मान ली।
लेकिन अंगूठी पहनने के महज दो-तीन दिनों बाद ही रामलाल की हालत बिगड़ गई। लिंग में भयानक सूजन आ गई, और अंगूठी बुरी तरह फंस गई, जिससे पेशाब करना भी मुश्किल हो गया। दर्द इतना असहनीय था कि रामलाल रात-दिन कराहते रहे। परिवार वाले घबरा गए और उसे तुरंत नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ओड़छा ले गए। लेकिन वहां की स्थिति और भी निराशाजनक थी – एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीज को जिला अस्पताल रेफर नहीं किया जा सका। डॉक्टरों ने बस कुछ दर्दनिवारक दवाएं देकर घर भेज दिया, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही।

एक सप्ताह तक असहनीय दर्द और तकलीफ झेलने के बाद, रामलाल की हालत इतनी खराब हो गई कि उनके होश उड़ गए। परिवार ने किसी तरह व्यवस्था की और 8 सितंबर को मोटरसाइकिल पर बैठाकर उसे नारायणपुर जिला अस्पताल पहुंचाया। यहां ओपीडी में पहुंचते ही मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत कार्रवाई की। जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. धनराज सिंह डरसेना और डॉ. शुभम राय ने टीम बनाकर मामले का परीक्षण किया। अंगूठी इतनी कसकर फंसी हुई थी कि इसे निकालना आसान नहीं था। विशेष उपकरणों की मदद से लगभग दो घंटे की कड़ी मेहनत, सर्जिकल कटिंग और आपसी समन्वय के बाद डॉक्टरों ने अंगूठी को काटकर निकाला। इस प्रक्रिया के दौरान मरीज को लोकल एनेस्थीसिया दिया गया, ताकि दर्द कम हो। निकालने के बाद सूजन को कम करने के लिए एंटीबायोटिक्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं दी गईं, और अब रामलाल की हालत स्थिर है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर थोड़ी और देरी होती, तो संक्रमण फैलकर जानलेवा हो सकता था।
यह घटना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों की समस्या को फिर से चर्चा में ला रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में हजारों की संख्या में ऐसे अयोग्य चिकित्सक सक्रिय हैं, जो अंधविश्वास, लोक उपचार और गलत दवाओं से मरीजों को नुकसान पहुंचाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गुप्तांग पर अंगूठी पहनने जैसी सलाह कुछ पुरानी अंधविश्वासी परंपराओं से प्रेरित हो सकती है, जहां माना जाता है कि धातु की वस्तुएं ‘ऊर्जा’ को नियंत्रित करती हैं, लेकिन वैज्ञानिक रूप से यह पूरी तरह गलत और खतरनाक है। इससे रक्त संचार रुक सकता है, सूजन आ सकती है और यहां तक कि गैंग्रीन जैसी गंभीर स्थिति भी हो सकती है।
👉 हमारे WhatsApp channel से जुड़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें👇👇
https://whatsapp.com/channel/0029VbALQC677qVNwdR5Le3V



