
झारखंड में कुड़मी समाज का Rail रोको आंदोलन : 15 से अधिक स्थानों पर Truck जाम, 69 ट्रेनें प्रभावित
झारखंड रांची में कुड़मी समाज ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) में शामिल करने की मांग को लेकर शनिवार को बड़ा रेल रोको आंदोलन छेड़ दिया। सुबह से ही हजारों की संख्या में समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा और ढोल-मांदर के साथ रेलवे ट्रैक पर उतर आए। आंदोलनकारियों ने 15 से अधिक स्थानों पर रेल लाइन जाम कर दी, जिसके चलते हावड़ा–नई दिल्ली मेन रेल लाइन बाधित हो गई और 69 से अधिक ट्रेनें प्रभावित हुईं।

रांची से धनबाद तक ठप रेल परिचालन
राजधानी रांची के राय, मुरी, टाटीसिल्वे और मेसरा स्टेशन पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र हुए। गिरिडीह, चक्रधरपुर, जामताड़ा, धनबाद और बोकारो में भी आंदोलन का असर देखा गया। धनबाद के प्रधानखंता स्टेशन पर तो सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प तक हो गई।
कुड़मी समाज ने झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के करीब 100 स्टेशनों पर रेल परिचालन ठप करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें झारखंड के लगभग 40 स्टेशन शामिल बताए जा रहे हैं।
रेलवे और प्रशासन सतर्क
रेलवे को कई ट्रेनों को रद्द, डायवर्ट और शॉर्ट-टर्मिनेट करना पड़ा। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। ड्रोन और सीसीटीवी से लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी ने रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक समर्थन भी मिला
आंदोलन को आजसू पार्टी और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा जैसे क्षेत्रीय दलों का समर्थन मिल रहा है। यह आंदोलन न सिर्फ आरक्षण और रोजगार से जुड़ा है, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का भी सवाल है।

सामाजिक–राजनीतिक असर
कुड़मी समाज लंबे समय से एसटी दर्जे की मांग कर रहा है। इस रेल रोको आंदोलन ने एक बार फिर राज्य की राजनीति और प्रशासन को चुनौती दी है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ आरक्षण की मांग नहीं, बल्कि झारखंड में सामाजिक-सांस्कृतिक अस्मिता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का भी मुद्दा है। यही वजह है कि आंदोलन का असर आम जनता से लेकर सियासी गलियारों तक गहराई से महसूस किया जा रहा है।
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