
जशपुर में ‘साइलेंट किलर’ का आतंक: करैत सांप के डसने से दो की मौत, जानें बचाव के तरीके
नागलोक में सर्पदंश की घटनाओं से दहशत, स्कूल और गांवों में बढ़ा खतरा
जशपुर, 23 जुलाई 2025
छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला, जिसे ‘नागलोक’ के नाम से जाना जाता है, इन दिनों कॉमन करैत सांप के खौफ के साये में है। बारिश के मौसम में इस जहरीले सांप ने दो अलग-अलग घटनाओं में एक शिक्षक और एक महिला की जान ले ली। कोतबा और बुलडेगा में हुई इन घटनाओं ने पूरे इलाके में डर का माहौल पैदा कर दिया है।
शिक्षक की सर्पदंश से दुखद मृत्यु
कोतबा नगर के निजी स्कूल के शिक्षक पवन उर्फ अनुपम खलखो (38) की कॉमन करैत के डसने से मौत हो गई। घटना सुबह 7 बजे उस समय हुई, जब वह अपने घर के बाथरूम में नहाने गए थे। गेट खोलते ही सांप ने उन्हें डस लिया। उनकी पत्नी संगीता ने तुरंत कोतबा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां से गंभीर हालत में उन्हें पत्थलगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। वहां वेंटिलेटर की जरूरत थी, लेकिन इलाज के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी। इस घटना ने शिक्षक कॉलोनी और स्कूल में भय फैला दिया है।

महिला पर रात में करैत का हमला
ग्राम पंचायत बुलडेगा के डोमपारा में शनिवार देर रात 12 बजे पूनम डोम (45) को जमीन पर सोते समय करैत सांप ने डस लिया। उन्हें शरीर पर कुछ ठंडा रेंगने का एहसास हुआ, लेकिन हड़बड़ाहट में सांप ने काट लिया। ग्रामीणों ने उन्हें तुरंत लैलूंगा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, लेकिन हालत बिगड़ने पर रायगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। रास्ते में झगरपुर के पास उनकी मृत्यु हो गई। बुधवार को पोस्टमॉर्टम के बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया।
जर्जर परिसर बना सांपों का ठिकाना
कोतबा का हाईस्कूल और आसपास का परिसर पुराने, जर्जर भवनों और बिना साफ-सफाई वाले मैदानों के लिए कुख्यात है। घास-झाड़ियों की कमी से यह क्षेत्र सांपों के लिए अनुकूल बन गया है। यहां पीएमश्री आत्मानंद स्कूल, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और अन्य संस्थान हैं, जहां हजारों बच्चे पढ़ने आते हैं। सांपों का खतरा बच्चों और शिक्षकों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

कॉमन करैत: खामोश हत्यारा
कॉमन करैत को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है, क्योंकि इसका डसना न तो दर्द देता है, न निशान छोड़ता है, और न ही कोई आवाज करता है। इसका जहर तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ, अंग सुन्न होना और मांसपेशियां काम करना बंद कर देती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, डसने के 90 मिनट के भीतर इलाज जरूरी है, वरना मृत्यु निश्चित है। बारिश में ये सांप घरों, बिस्तरों और अंधेरे कोनों में छिप जाते हैं।
सर्पदंश से बचने के उपाय
- सतर्कता: कपड़े, बिस्तर या रजाई इस्तेमाल करने से पहले जांच लें।
- जमीन से बचें: बारिश में पलंग पर सोएं और मच्छरदानी का उपयोग करें।
- रात में सावधानी: बिना रोशनी के बाहर न जाएं, क्योंकि करैत काटकर भाग जाता है।
- तत्काल उपचार: सर्पदंश होने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र जाएं और हिलने-डुलने से बचें।
जागरूकता और सफाई की जरूरत
जशपुर में बारिश के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ रही हैं। प्रशासन और स्थानीय लोगों से अपील है कि स्कूलों, कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थानों की नियमित सफाई की जाए। साथ ही, सर्पदंश से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएं ताकि ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
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