
जन्म से दृष्टिहीन 6 साल की बच्ची को नई जिंदगी: नेत्र प्रत्यारोपण से लौट आई रोशनी
छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के संबद्ध डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सा संस्थान में नेत्र रोग विभाग की टीम द्वारा एक अद्वितीय सफलता हासिल की गई है। यहां छह साल की जन्म से दृष्टिहीन बच्ची के लिए कार्निया (कॉर्निया) ट्रांसप्लांट (प्रत्यारोपण) किया गया, जिससे अब वह दुनिया को अपनी आँखों से देख सकेगी।

यह ऑपरेशन सीनियर नेत्र विशेषज्ञ व विभागाध्यक्ष डॉ. कॉमिल्य प्रसाद, डॉ. निधि, डॉ. मयूरी गुप्ता और उनकी टीम ने सफलतापूर्वक पूर्ण किया। मरीज बच्ची का चयन डॉ. मयूरी गुप्ता ने किया था, जिन्होंने परामर्श के दौरान बच्ची की आंख की गहरी जांच कर उसे ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त पाया। टीम ने सफल सर्जरी के बाद यह सुनिश्चित किया कि भविष्य में भी मरीज को नियमित फॉलोअप पर रखा जाए। ऑपरेशन के बाद बच्ची की आंखों में रोशनी लौट आई और वह अब दुनिया को देखने लगी है।
कार्निया विशेषज्ञ डॉ. मयूरी गुप्ता ने बताया कि बच्ची की रौशनी लौटते ही उसके परिवार की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। बच्ची की आंखों में किसी बीमारी के चलते कार्निया पूरी तरह खराब हो गया था। इसके चलते जन्म से ही वे देख नहीं पाती थी। ऐसे में डोनर की आंखों से प्राप्त कॉर्निया लगाकर यह सर्जरी की गई। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि ऑपरेशन की सभी सावधानियों का पूरा ध्यान रखा गया और बच्ची की उम्र के हिसाब से जरूरी अतिरिक्त व्यवस्थाएं की गईं।
डॉ. संजीव सोनीकर (नेत्र विभाग) ने बताया कि प्रत्यारोपण के लिए नेत्रदान व्यवस्था बहुत जरूरी है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि अधिक से अधिक लोग आगे आकर नेत्रदान करें, ताकि और भी जरूरतमंद लोगों की जिंदगी में रौशनी लौट सके।
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