
IPS पूरन कुमार केस: DGP समेत 13 अफसरों पर FIR, सुसाइड नोट में लगाए थे गंभीर आरोप
चंडीगढ़, 10 अक्टूबर 2025: हरियाणा कैडर के 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या के मामले ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। चंडीगढ़ पुलिस ने मंगलवार को डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर समेत 13 वरिष्ठ अधिकारियों और पूर्व अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सुसाइड नोट में कुमार ने मानसिक प्रताड़ना, जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने परिवार को निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है, जबकि आरोपी अधिकारियों पर छुट्टी भेजने की चर्चा तेज हो गई है।

घटना का पूरा घटनाक्रम: वसीयत से आत्महत्या तक
यह दर्दनाक घटना 6 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई, जब आईपीएस वाई. पूरन कुमार ने अपनी पत्नी आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार के नाम सभी चल-अचल संपत्ति की वसीयत तैयार की। उसी दिन उन्होंने सुसाइड नोट भी लिखा और पत्नी को भेज दिया। 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित उनके आवास के साउंडप्रूफ बेसमेंट में कुमार ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली। उस वक्त अमनीत जापान में हरियाणा मुख्यमंत्री नायब सैनी के प्रतिनिधिमंडल के साथ थीं। उन्होंने पति को 15 बार फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। आखिरकार, उन्होंने बेटी अमुल्या से संपर्क किया, जिन्होंने बेसमेंट में शव की खोजबीन की।
अमनीत 8 अक्टूबर को भारत लौटीं और तुरंत सेक्टर-11 थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पति के शव का पोस्टमॉर्टम भी रोका दिया, जो सेक्टर-16 अस्पताल के शवगृह में रखा रहा। अमनीत ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की, जिसमें सभी आरोपी अधिकारियों की गिरफ्तारी और परिवार को स्थायी सुरक्षा शामिल थी। 9 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज हुई, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने डीजीपी से मुलाकात की और परिवार को सांत्वना दी।

सुसाइड नोट के सनसनीखेज आरोप: जातिगत उत्पीड़न और मानसिक तोड़फोड़
कुमार के कई पन्नों के सुसाइड नोट ने पूरे महकमे को झकझोर दिया। इसमें उन्होंने 13 अधिकारियों के नाम लेकर गंभीर आरोप लगाए। नोट के अनुसार, बैचमेट आईपीएस मनोज यादव, पी.के. अग्रवाल और पूर्व मुख्य सचिव टी.वी.एस.एन. प्रसाद ने जातिगत भेदभाव के जरिए साजिश रची। कुमार ने बताया कि उन्होंने गृह मंत्री और मुख्य सचिव को शिकायतें भेजीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आईपीएस कुलविंदर सिंह ने फोन पर चेतावनी दी थी कि डीजीपी ने उन्हें स्थायी रूप से सेवा से हटाने का आदेश दिया है। वहीं, आईपीएस माटा रवि किरण ने उनके खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जिसे कुमार ने अपनी मौत का मुख्य कारण बताया। नोट के अंतिम पृष्ठ पर उन्होंने लिखा, “मैं अब और सहन नहीं कर सकता। जो लोग मुझे इस हालत तक ले आए, वही मेरी मौत के जिम्मेदार हैं।” इन आरोपों ने न केवल पुलिस प्रशासन, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी बहस छेड़ दी है।
एफआईआर में नामित 13 अधिकारी: डीजीपी से लेकर पूर्व मुख्य सचिव तक
चंडीगढ़ पुलिस ने 9 अक्टूबर को सेक्टर-11 थाने में एफआईआर नंबर 156 दर्ज की। यह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज हुई है। एफआईआर सुसाइड नोट और अमनीत की शिकायत पर आधारित है। नामित अधिकारियों में शामिल हैं:
- हरियाणा डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर
- रोहतक एसपी नरेंद्र बिजारनिया
- मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी
- पूर्व मुख्य सचिव टी.वी.एस.एन. प्रसाद
- पूर्व एसीएस राजीव अरोड़ा
- आईपीएस मनोज यादव (बैचमेट)
- आईपीएस पी.के. अग्रवाल (बैचमेट)
- आईपीएस कुलविंदर सिंह
- आईपीएस माटा रवि किरण
बाकी चार अधिकारियों के नाम भी नोट में उल्लिखित हैं, लेकिन विस्तार से नहीं बताए गए। पुलिस कॉल रिकॉर्ड, प्रशासनिक दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
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