
Indravati को भेंट की गई सोने की नाव और चांदी की पतवार, मांगी गई नयाखानी तिहार की अनुमति
जगदलपुर। बस्तर की जीवनदायिनी मानी जाने वाली इंद्रावती नदी के किनारे बसे ग्राम घाटकवाली में सदियों पुरानी परंपरा आज भी जीवित है। मंगलवार को यहां ग्रामीणों ने पारंपरिक अनुष्ठान के तहत नदी को सोने की नाव और चांदी की पतवार अर्पित की। इसके साथ ही ग्रामदेवी जलनी आया से आगामी नयाखानी तिहार मनाने की अनुमति मांगी गई।

सात शताब्दियों से जारी परंपरा
ग्राम के माटी पुजारी मंगतु राम कश्यप ने बताया कि यह परंपरा गांव की स्थापना के साथ ही लगभग 700 वर्ष पूर्व शुरू हुई थी। आज भी निरंतर यह अनुष्ठान उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाता है। ग्रामीण मानते हैं कि इंद्रावती ही उनके जीवन, आजीविका और खेती का आधार है।
अर्पण में शामिल होती हैं विशेष भेंट
सेवा अर्जी विधान के अंतर्गत नदी और ग्रामदेवी को सोने की नाव, चांदी की पतवार के साथ ही सफेद बकरा, चोका मुर्गा, चोकी मुर्गी, साठ दिन में पकने वाले धान की बालियां (साठका) और लांदा अर्पित किए गए। अनुष्ठान के बाद नयाखानी पर्व की अनुमति ली गई।

ग्रामीणों की बड़ी सहभागिता
इस मौके पर वरिष्ठ नागरिक सीताराम, श्यामसुंदर, पंडरू कश्यप, सम्पत, इश्पर, विजय, रामनाथ, जुगल, कुमर, मयतर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। नदी किनारे का यह अनुष्ठान पूरे क्षेत्र में आस्था और परंपरा का प्रतीक बन गया।
👉 इंद्रावती को भेंट अर्पित करने की यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आभार और कृषि पर निर्भरता की प्रतीक भी मानी जाती है।
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