
IAS अधिकारी की ट्रांसफर याचिका खारिज,वकील की गैरहाजिरी पर High Court का सख्त रुख
बिलासपुर। जांजगीर-चांपा जिले में पदस्थ रहने के दौरान एक महिला द्वारा लगाए गए यौन शोषण और जातिगत प्रताड़ना के आरोपों के मामले में आईएएस अधिकारी जनक प्रसाद पाठक की ट्रांसफर पिटीशन को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। अधिकारी ने केस को जांजगीर-चांपा से हटाकर दूसरे जिले में ट्रांसफर करने की मांग की थी।
महिला ने लगाए थे दुष्कर्म व जातिगत प्रताड़ना के गंभीर आरोप
पीड़िता ने आरोप लगाया था कि जांजगीर-चांपा में पदस्थ रहने के दौरान आईएएस अधिकारी ने उसका यौन शोषण किया और जातिगत रूप से प्रताड़ित भी किया। शिकायत के आधार पर अधिकारी के खिलाफ दुष्कर्म और एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
यह मामला फिलहाल जांजगीर-चांपा की विशेष अत्याचार न्यायालय में ट्रायल के रूप में विचाराधीन है।

हाईकोर्ट में केस ट्रांसफर की मांग
आईएएस जनक प्रसाद पाठक ने हाईकोर्ट में ट्रांसफर पिटीशन दायर कर मांग की थी कि मामले को जांजगीर-चांपा से हटाकर प्रदेश के किसी अन्य कोर्ट में भेजा जाए।
शुक्रवार को यह याचिका चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थी।
बार-बार बुलाने पर भी नहीं पहुंचे वकील
हाईकोर्ट ने आदेश में दर्ज किया कि मामले को आवाज देकर बुलाया गया, लेकिन न तो आवेदक के वकील उपस्थित हुए और न ही उन्होंने कोई स्थगन आवेदन दिया।
कोर्ट ने कहा—
“बार-बार बुलाने के बाद भी अधिवक्ता की अनुपस्थिति से प्रतीत होता है कि आवेदक स्वयं इस याचिका को आगे नहीं बढ़ाना चाहते।”
वकील व पीड़िता पक्ष की गैरहाजिरी पर याचिका खारिज
अधिवक्ता की लगातार अनुपस्थिति और याचिका पर रुचि न दिखाने के आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रांसफर पिटीशन को खारिज कर दिया।
अब केस जांजगीर-चांपा की उसी विशेष अदालत में आगे ट्रायल के लिए जारी रहेगा, जहां यह पहले से लंबित है।
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