
IAS अधिकारी अनिल कुमार पवार को बड़ा झटका? ED ने लिया ये फैसला, मचा हड़कंप
मुंबई, 17 अक्टूबर 2025: (ईडी) ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसमें आईएएस अधिकारी अनिल कुमार पवार की गिरफ्तारी को अवैध घोषित किया गया था। पवार वसई-विरार सिटी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (वीवीएमसी) के पूर्व कमिश्नर हैं और उन पर सरकारी जमीन पर 41 अवैध इमारतों के निर्माण से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप लगे हैं। ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दाखिल की है, जिस पर शुक्रवार सुबह सुनवाई हो सकती है। इस कदम से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

मामले की पृष्ठभूमि
अनिल कुमार पवार पर आरोप है कि उन्होंने वीवीएमसी कमिश्नर रहते हुए सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण को मंजूरी दी, जिससे करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई। ईडी के अनुसार, इस घोटाले से पवार ने लगभग 169 करोड़ रुपये की कमाई की। जाँच एजेंसी ने हाल ही में पवार की 44 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं, जिसमें जमीन, फ्लैट और अन्य संपत्तियां शामिल हैं। यह मामला वसई-विरार क्षेत्र में सरकारी भूमि पर बनी 41 इमारतों से जुड़ा है, जहां बिल्डरों और अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों की अनदेखी की गई।

ईडी की गिरफ्तारी और दलीलें
ईडी ने पवार को गिरफ्तार करते हुए दावा किया कि उन्होंने गिरफ्तारी से पहले सबूत नष्ट करने की कोशिश की। सूत्रों के मुताबिक, जब ईडी अधिकारी उनके घर पर तलाशी लेने पहुंचे, तो पवार ने दो घंटे तक दरवाजा नहीं खोला और इस दौरान मोबाइल से मैसेज डिलीट करने की कोशिश की। ईडी के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने अदालत में कहा कि गिरफ्तारी के आधार पर ठोस सबूत थे, जिसमें गवाहों के बयान और व्हाट्सएप चैट शामिल हैं।
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