
50% टैरिफ से 18% तक India के लिए कैसे पिघला America? ट्रंप की धमकी… रूस तेल विवाद और आखिरकार अब बनी ट्रेड डील
नई दिल्ली: भारत पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ से आखिरकार अमेरिका पीछे हट गया है। करीब एक साल तक चली तल्ख़ी, धमकियों और सख्त बयानों के बाद अब भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर सहमति बन गई है। 2 फरवरी 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान कर दिया कि भारत पर लगाया गया कुल टैरिफ 50% से घटाकर 18% किया जा रहा है।

50% टैरिफ के बाद बदला घटनाक्रम
अगस्त 2025
भारत पर 50% टैरिफ लगाने के बाद ट्रंप प्रशासन ने साफ संकेत दिए कि रूस से तेल खरीद ही सबसे बड़ा रोड़ा है। अमेरिका चाहता था कि भारत रूसी कच्चे तेल से दूरी बनाए।
सितंबर–अक्टूबर 2025
ट्रंप–मोदी के बीच बैकडोर डिप्लोमेसी के संकेत मिले। हालांकि रूस तेल को लेकर मतभेद बरकरार रहे। भारत ने साफ कहा- ऊर्जा सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा।
दिसंबर 2025
पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच गरमजोशी भरी फोन बातचीत की पुष्टि हुई। बातचीत में व्यापार संतुलन, ऊर्जा और रक्षा खरीद पर आगे बढ़ने के संकेत मिले।
जनवरी 2026
अमेरिकी प्रतिनिधियों ने स्वीकार किया कि दोनों देश समझौते के बेहद करीब हैं। कृषि, डेयरी और आयात शुल्क जैसे मुद्दों पर बीच का रास्ता निकाला गया।
2 फरवरी 2026
ट्रंप का बड़ा ऐलान-
- भारत पर प्रभावी टैरिफ 50% से घटाकर 18%
- व्यापार समझौते की आधिकारिक घोषणा
- भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत

क्यों झुका अमेरिका?
भारत की सख्त कूटनीति
धमकियों के बावजूद भारत ने न तो जल्दबाजी दिखाई, न दबाव में फैसले किए।
रणनीतिक साझेदारी का दबाव
चीन के मुकाबले भारत को खोना अमेरिका के लिए महंगा सौदा होता।
अमेरिकी उद्योगों का दबाव
50% टैरिफ से अमेरिकी कंपनियों को भी नुकसान होने लगा था।
भारत की बढ़ती खपत और बाजार ताकत
भारत अब सिर्फ आयातक नहीं, बल्कि बड़ा उपभोक्ता बाजार बन चुका है।

अब भारत को क्या फायदा?
- भारतीय सामानों पर टैरिफ में 32% की सीधी राहत।
- टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो पार्ट्स और इंजीनियरिंग। सेक्टर को फायदा।
- अमेरिका में भारतीय निर्यात फिर से रफ्तार पकड़ेगा
- चीन-पाकिस्तान के मुकाबले भारत की स्थिति मजबूत
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