
Himanchal Pradesh में भयानक हादसा: भूस्खलन की चपेट में आई बस, 15 लोगों की दर्दनाक मौत
बिलासपुर, 8 अक्टूबर 2025 : हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में मंगलवार शाम को एक दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। भारी बारिश और पश्चिमी विक्षोभ के असर से पहाड़ी से अचानक भूस्खलन शुरू हो गया, जिसमें मलबा और विशाल चट्टानें एक यात्री बस पर जा गिरीं। बस की छत पूरी तरह उखड़ गई और वाहन खाई में धंस गया, जिससे मलबे के नीचे दबकर 15 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। बस में सवार 25 से 30 यात्रियों में से केवल 3-4 को अब तक सुरक्षित निकाला जा सका है, जबकि कई अन्य अभी भी मलबे में फंसे होने की आशंका है। यह घटना राज्य में मानसून के बाद बढ़ते भूस्खलन की भयावहता को दर्शाती है, जहां जून से अब तक 179 मौतें दर्ज हो चुकी हैं।

हादसे का पूरा विवरण: कैसे हुई यह त्रासदी?
घटना बिलासपुर जिले के झंडूता विधानसभा क्षेत्र के बरठीं इलाके में भल्लू पुल (या भलू) के समीप शाम करीब 6:25 बजे हुई। मरोतन से घुमारवीं (या घुमावीं) की ओर जा रही एक निजी यात्री बस (कुछ रिपोर्ट्स में HRTC बस का जिक्र) पहाड़ी के किनारे से गुजर रही थी। तभी अचानक ऊपरी पहाड़ी से भारी मलबा, बड़े-बड़े पत्थर और चट्टानें धड़ाम से नीचे लुढ़क पड़ीं। बस की छत पर सीधा मलबा गिरने से वाहन का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और यह 8-10 फीट गहरे मलबे के नीचे दब गया।

चश्मदीदों के मुताबिक, बस चालक ने भूस्खलन की आवाज सुनते ही ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन इतनी तेज गति से मलबा गिरा कि बचाव का कोई मौका ही नहीं मिला। बस खाई की ओर खिसक गई और मलबे में पूरी तरह दब गई। स्थानीय ग्रामीणों ने धूल और शोर सुनकर तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और प्रशासन को सूचना दी। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, बस में ज्यादातर स्थानीय निवासी, किसान और दैनिक यात्री सवार थे, जो बाजार या रिश्तेदारों से लौट रहे थे। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं, हालांकि शवों की पहचान अभी पूरी नहीं हो सकी है।

मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, हिमाचल में मानसून की विदाई के बाद भी पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है, जिससे मंडी, बिलासपुर और कांगड़ा जैसे जिलों में लगातार भारी बारिश हो रही है। इस सीजन में भूस्खलन और बाढ़ से 101 मौतें हो चुकी हैं, जबकि सड़क हादसों में 78। वर्तमान में 617 सड़कें बंद हैं, जिनमें 4 राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और पहाड़ी क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण ने ऐसी घटनाओं को और घातक बना दिया है।
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