
हिमाचल में मानसून का कहर: 147 लोगों की मौत, 274 सड़कें अवरुद्ध
मानसून की तबाही
हिमाचल प्रदेश में इस साल मानसून ने भारी तबाही मचाई है। 24 जुलाई 2025 तक, भूस्खलन और बाढ़ के कारण कम से कम 147 लोगों की जान जा चुकी है। भारी बारिश ने राज्य की 274 सड़कों को अवरुद्ध कर दिया है, जिससे कई क्षेत्रों में यातायात और आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। शिमला, कुल्लू और मंडी जैसे जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। भूस्खलन के कारण कई घर ढह गए, और सड़कों पर मलबा जमा होने से बचाव कार्यों में भी बाधा आ रही है।
बचाव और राहत कार्य
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रबंधन बल ने प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य शुरू किए हैं। हिमाचल सरकार ने केंद्र से अतिरिक्त सहायता मांगी है, और प्रभावित परिवारों के लिए राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। कई गांवों में बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित होने से स्थिति और गंभीर हो गई है।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों में मानसून की तीव्रता बढ़ रही है। अनियमित बारिश और भूस्खलन की घटनाएं अब पहले से कहीं अधिक घातक हो रही हैं। पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि अनियोजित निर्माण और जंगलों की कटाई ने इस आपदा को और बढ़ाया है। स्थानीय निवासियों ने सरकार से मांग की है कि सड़कों और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक नीतियां बनाई जाएं।
भविष्य के लिए सबक
इस आपदा ने हिमाचल में आपदा प्रबंधन और बुनियादी ढांचे की कमियों को उजागर किया है। सरकार से मांग की जा रही है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत आपदा प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाए। साथ ही, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना होगा। स्थानीय समुदायों को प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए आपदा से निपटने के लिए तैयार करना भी जरूरी है।
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