
High Court ने दोहरे हत्याकांड के आरोपी मनोज अग्रवाल की परिवीक्षा पर रिहाई का आदेश जारी
बिलासपुर। दोहरे हत्याकांड के आरोपी मनोज अग्रवाल की परिवीक्षा पर रिहाई को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने जेल विभाग के अंडर सेक्रेटरी द्वारा जारी आदेश को रद्द करते हुए आरोपी की रिहाई का निर्देश दिया है।
अंडर सेक्रेटरी जेल का आदेश किया गया रद्द
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि 01 मई 2025 को अंडर सेक्रेटरी जेल द्वारा जारी किया गया आदेश विधि की दृष्टि से सही नहीं है। कोर्ट ने इसे निरस्त करते हुए मनोज अग्रवाल को छत्तीसगढ़ कैदी परिवीक्षा रिहाई अधिनियम, 1954 के तहत रिहा करने का आदेश दिया।
2012 में हुआ था दोषसिद्धि
याचिकाकर्ता मनोज अग्रवाल को 30 अप्रैल 2012 को बिलासपुर सत्र न्यायालय ने आईपीसी की धारा 147, 148, 302, 302/149 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 व 27 के तहत दोषी ठहराया था। वह वर्ष 2010 से विभिन्न अवधियों में जेल में बंद रहा और वर्तमान में 16 मार्च 2021 से लगातार कारावास भुगत रहा है।
14 साल से अधिक की सजा पूरी
कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार मनोज अग्रवाल ने अब तक 14 वर्ष 8 माह की वास्तविक सजा पूरी कर ली है। इसके अलावा उसे 4 फरवरी 2025 तक 3 वर्ष 5 माह 25 दिन की कारावास छूट भी मिल चुकी है।

2018 के बाद कोई नया अपराध नहीं
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि वर्ष 2018 के बाद आरोपी के खिलाफ कोई नया कारावास अपराध दर्ज नहीं हुआ है। केवल पुराने मामलों के आधार पर परिवीक्षा आवेदन खारिज करना उचित नहीं है। हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि पुराने अपराधों को ही आधार बनाकर परिवीक्षा से इनकार नहीं किया जा सकता।
राज्य सरकार और परिवीक्षा बोर्ड का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता कार्यालय ने जेल विभाग के आदेश का समर्थन किया। वहीं, राज्य परिवीक्षा बोर्ड ने अपनी बैठक में आरोपी के जेल व्यवहार और पूर्व अपराधों का हवाला देते हुए परिवीक्षा के विरुद्ध राय दी थी। बोर्ड ने जेल में नियम उल्लंघन और अर्जित छूट की जब्ती का भी उल्लेख किया।
कोर्ट ने क्या कहा
हाईकोर्ट ने कहा कि अपराध की गंभीरता के बावजूद यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि याचिकाकर्ता ने लंबी सजा पूरी कर ली है और भविष्य में अपराध करने की कोई ठोस संभावना सामने नहीं आई है। इसके साथ ही पुलिस, स्टेशन हाउस अधिकारी और जिला मजिस्ट्रेट की सिफारिश भी आरोपी के पक्ष में पाई गई।
शर्तों के साथ रिहाई के निर्देश
कोर्ट ने आदेश दिया कि मनोज अग्रवाल को सक्षम प्राधिकारी की संतुष्टि एवं निर्धारित शर्तों के अधीन परिवीक्षा पर रिहा किया जाए। इसी के साथ डिवीजन बेंच ने याचिका को स्वीकार करते हुए आरोपी की रिहाई को वैधानिक रूप से सुनिश्चित कर दिया।
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