
High Court ने कहा – सरकार कर सकती है दिव्यांगों के लिए आरक्षण का फैसला:
प्रोफेसर भर्ती में दृष्टिबाधित और कम दृष्टि वाले व्यक्तियों को नहीं मिला आरक्षण, याचिका खारिज
हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आरक्षण का निर्णय सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। यह टिप्पणी उस याचिका के संदर्भ में आई, जिसमें प्रोफेसर पदों की भर्ती में दृष्टिबाधित और कम दृष्टि वाले व्यक्तियों को आरक्षण नहीं दिए जाने का मुद्दा उठाया गया था। कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि आरक्षण नीति निर्धारित करना सरकार का विशेषाधिकार है।

याचिका में क्या थी मांग?
याचिका दृष्टिबाधित और कम दृष्टि वाले व्यक्तियों की ओर से दायर की गई थी, जिन्होंने प्रोफेसर के पदों पर भर्ती में दिव्यांगों के लिए आरक्षित कोटे की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत उन्हें आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। हालांकि, भर्ती प्रक्रिया में इस प्रावधान को लागू नहीं किया गया था।
कोर्ट का तर्क: सरकार का नीतिगत मामला
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरक्षण का निर्धारण एक नीतिगत मामला है, और यह सरकार के विवेक पर निर्भर करता है कि वह किन पदों के लिए और कितना आरक्षण लागू करे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अदालत नीतिगत निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती, जब तक कि यह स्पष्ट रूप से कानून का उल्लंघन न हो।
दिव्यांगों के अधिकारों पर बहस
इस फैसले ने एक बार फिर दिव्यांगों के लिए समान अवसर और आरक्षण के मुद्दे पर बहस को हवा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को चाहिए कि वह दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम को और प्रभावी ढंग से लागू करे, ताकि उच्च शिक्षा और सरकारी नौकरियों में उनकी भागीदारी बढ़ सके।
याचिकाकर्ताओं की प्रतिक्रिया
याचिका खारिज होने के बाद याचिकाकर्ताओं ने निराशा जताई है। उनके वकील ने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने पर विचार कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रोफेसर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर दिव्यांगों को अवसर न देना उनके अधिकारों का हनन है।
👉 हमारे WhatsApp channel से जुड़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें👇👇
https://whatsapp.com/channel/0029VbALQC677qVNwdR5Le3V



