
High Court की सख्त टिप्पणी: सड़क पर अतिक्रमण समाज के लिए खतरा
कोर्ट की चेतावनी
हाईकोर्ट ने सड़क अतिक्रमण के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि अमीरजादों पर हल्की कार्रवाई समाज के लिए खतरा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सड़क किसी की निजी संपत्ति नहीं है और इसे सार्वजनिक उपयोग के लिए खुला रखना जरूरी है। कोर्ट ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि अगर संतोषजनक रिपोर्ट पेश नहीं की गई, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। यह टिप्पणी एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें सड़कों पर अतिक्रमण हटाने की मांग की गई थी।

अतिक्रमण की समस्या
शहरों में सड़कों और फुटपाथों पर अतिक्रमण एक बड़ी समस्या बन चुका है। दुकानें, ठेले, और अवैध निर्माण सड़कों को संकरा कर रहे हैं, जिससे यातायात और पैदल यात्रियों को परेशानी हो रही है। कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति न केवल असुविधा पैदा करती है, बल्कि दुर्घटनाओं का कारण भी बनती है। खासकर अस्पतालों और स्कूलों के आसपास अतिक्रमण की स्थिति और भी गंभीर है।
प्रशासन की जिम्मेदारी

हाईकोर्ट ने स्थानीय प्रशासन और नगर निगम को निर्देश दिए कि वे तत्काल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि अतिक्रमण हटाने के बाद नियमित निगरानी की जाए ताकि यह समस्या दोबारा न हो। अधिकारियों को समय-सीमा के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया है।
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