
नक्सली नेता माडवी हिडमा मारा गया: कई हमलों का मास्टरमाइंड, गिरफ्तारी पर भारी इनाम
रायपुर। प्रदेश में नक्सल गतिविधियों के सबसे खतरनाक चेहरों में शामिल माडवी हिडमा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में रहा है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य रह चुका हिडमा कई बड़े नक्सली हमलों में अपनी भूमिका के लिए बदनाम है। उसके ऊपर सरकार ने भारी इनाम घोषित कर रखा है।
कौन है माडवी हिडमा?
माडवी हिडमा का जन्म वर्ष 1981 के आसपास हुआ था। बेहद कम उम्र से ही वह नक्सली गतिविधियों में सक्रिय हो गया और अपनी युवावस्था में ही माओवादी संगठन की केंद्रीय समिति तक पहुँच गया। बताया जाता है कि हिडमा केंद्रीय समिति का सबसे कम उम्र का सदस्य था।

नक्सली संगठन में ऊँचा कद
हिडमा संगठन के बटालियन नंबर-1 का नेतृत्व करता था, जो माओवादियों की सबसे खतरनाक और सक्रिय इकाई मानी जाती है। उसकी रणनीति, इलाके की जानकारी और हमलों की योजना बनाने की क्षमता के कारण वह शीर्ष नेतृत्व के बेहद करीब रहा।
26 से अधिक बड़े हमलों का मास्टरमाइंड
माडवी हिडमा लगातार दो दशकों से माओवादी संगठन की हिंसक गतिविधियों का प्रमुख चेहरा बना हुआ था। वह कम से कम 26 बड़े हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है, जिनमें सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों और नागरिकों की जान गई थी।
उसके द्वारा अंजाम दिए गए कुछ सबसे भीषण हमले:
- 2010 ताड़मेटला हमला (दंतेवाड़ा): सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद, नक्सल इतिहास का सबसे बड़ा हमला।
- 2013 झीरम घाटी नरसंहार (दरभा घाटी): कांग्रेस नेताओं समेत 27–31 लोगों की हत्या।
- 2017 सुकमा बुरकापाल हमला: सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद।
- 2021 सुकमा-बीजापुर तार्रेम मुठभेड़: 22 जवान शहीद, हिडमा की सीधी भूमिका मानी गई।
- PLGA बटालियन नंबर-1 का प्रमुख.
हिडमा पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की बटालियन नंबर-1 का कमांडर था। यह यूनिट माओवादियों की सबसे आक्रामक, प्रशिक्षित और घातक हमलावर इकाई मानी जाती है।
उसकी रणनीति, जंगलों की जानकारी और घात लगाकर हमला करने की क्षमता ने उसे संगठन में सबसे खतरनाक चेहरा बना दिया था।
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