
Bilaspur : हाईकोर्ट का सख्त रुख, सरकारी विभागों की सुस्ती पर कड़ी फटकार
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बार फिर सरकारी विभागों की सुस्त कार्यप्रणाली और लालफीताशाही पर तीखी टिप्पणी की है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा एक सेवानिवृत्त महिला कर्मचारी के खिलाफ दायर अपील को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि सरकारी तंत्र में ईमानदारी और जिम्मेदारी से काम करना बेहद जरूरी है।
फाइलों का वर्षों तक लंबित रहना प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि विभागों में फाइलें महीनों और वर्षों तक लंबित रहना यह दर्शाता है कि सरकारी कामकाज में लापरवाही और सुस्ती हावी है। अदालत ने कहा कि इस तरह की देरी जनता के अधिकारों का हनन करती है और प्रशासनिक दक्षता पर सवाल उठाती है।

औपचारिकताएं देरी का ठोस कारण नहीं — कोर्ट
कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि सरकारी विभागों के लिए सामान्य प्रक्रियाएं या औपचारिकताएं किसी भी तरह से देरी का औचित्य नहीं बन सकतीं। अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे सार्वजनिक हित में समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से काम करें।
अपील खारिज, विभाग को चेतावनी
महिला एवं बाल विकास विभाग की अपील को निराधार पाते हुए हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया और विभाग को चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी लापरवाही और अनावश्यक अपीलों से बचा जाए। अदालत ने कहा कि “विभागों को अपनी जवाबदेही समझनी होगी, क्योंकि जनता के धन और समय की बर्बादी अस्वीकार्य है।
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