March 3, 2026
गुरुग्राम में 40 करोड़ की साइबर ठगी: Mobikwik App की तकनीकी खामी से बड़ा Financial Fraud

गुरुग्राम में 40 करोड़ की साइबर ठगी: Mobikwik App की तकनीकी खामी से बड़ा Financial Fraud

Sep 19, 2025

गुरुग्राम में हाल ही में एक बड़ा साइबर फ्रॉड सामने आया जिसने पूरे फिनटेक सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। टीवी9 भारतवर्ष की रिपोर्ट के मुताबिक, मोबिक्विक ऐप में आई तकनीकी गड़बड़ी का फायदा उठाकर शातिर बदमाशों ने करीब 40 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया। इस मामले में गुरुग्राम पुलिस ने छापेमारी कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है और आगे की जांच तेजी से जारी है।

 

कैसे हुआ फ्रॉड का पर्दाफाश?

मोबिक्विक कंपनी को 11-12 सितंबर को नियमित ऑडिट के दौरान संदेहास्पद ट्रांजेक्शनों का पता चला। इंटरनल जांच में पाया गया कि कुछ घंटों के लिए कंपनी के बैंक-वॉलेट इंटरफेस में गंभीर तकनीकी समस्या आई, जिसके चलते कुछ असफल ट्रांजेक्शन भी सफल मान लिए गए। आरोपियों ने इस ग्लिच का तुरंत फायदा उठाकर, भारी रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी।

आरोपियों की गिरफ्तारी और कार्रवाई

गुरुग्राम पुलिस ने मामले की सूचना मिलने के तुरंत बाद जांच शुरू की। जांच में पाया गया कि यह रैकेट मुख्य रूप से नूंह जिले से संचालित हो रहा था। पुलिस ने छापेमारी कर मुख्य आरोपी समेत पांच अन्य को गिरफ्तार किया। सभी आरोपी संगठित तरीके से लेन-देन कर रहे थे और फर्जी आईडी का उपयोग कर रहे थे।

कितनी बड़ी थी रकम और कहां-कहां गई?

  • कुल लगभग 40.22 करोड़ रुपये का फ्रॉड
  • 2,500 से ज्यादा बैंक खाते इस घोटाले में शामिल
  • बहुत बड़ी मात्रा में रकम अकाउंट्स और वॉलेट्स के जरिये ट्रांसफर की गई
  • जांच एजेंसी ने 2,500 खातों को फ़्रीज़ कर लगभग 8-14 करोड़ रुपए की रिकवरी शुरू कर दी है

मोबिक्विक कंपनी की सफाई

कंपनी ने अपने आधिकारिक बयानों में कहा है कि यह कोई बाहरी साइबर अटैक नहीं था, बल्कि सिस्टम में आई अस्थायी तकनीकी समस्या थी, जिसे 45 मिनट के भीतर दुरुस्त कर लिया गया। कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि इस घटना से ग्राहकों के वॉलेट बैलेंस या पर्सनल डाटा पर कोई असर नहीं पड़ा है। फिर भी, यूजर सिक्योरिटी और सिस्टम मॉनिटरिंग और अधिक मजबूत कर दी गई है।

 

सुरक्षा पर सलाह

  • कभी भी संदिग्ध लिंक या एप्लीकेशन का उपयोग न करें
  • बैंकिंग ऐप्स को हमेशा अपडेट रखें
  • संदिग्ध लेन-देन अथवा ट्रांजेक्शन तुरंत बैंक और पुलिस को सूचित करें
  • अपना पासवर्ड और ओटीपी किसी के साथ साझा न करें

यह घटना भारत में डिजिटल ट्रांजेक्शन की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता के साथ-साथ उसकी कमजोरियों को भी उजागर करती है। तकनीक जितना फायदा देती है, उतना ही उसमें सुरक्षा और सतर्कता भी जरूरी है।

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