
GST रिफॉर्म 2.0: कोयले पर Tax हटाने से बिजली लागत में कमी
GST रिफॉर्म 2.0 में कोयले पर लगाया जाने वाला 400 रुपए प्रति टन का कंपनसेशन सेस पूरी तरह हटा दिया गया है, जबकि कोयले पर लगने वाली जीएसटी की दर 5% से बढ़ाकर 18% कर दी गई है। इस बदलाव का मकसद कोयले की खरीद पर कर के बोझ को तर्कसंगत बनाना और कोयला आधारित बिजली उत्पादन की लागत को कम करना था। इससे बिजली उत्पादन की लागत में प्रति यूनिट लगभग 11 से 18 पैसे तक की कमी आ सकती है, जिससे theoretically बिजली बिल में राहत मिलनी चाहिए थी।

हालांकि, अभी तक आम उपभोक्ताओं को बिजली बिल में इसका कोई अक्स नहीं दिखा है। इसका कारण यह हो सकता है कि बिजली बिल में अभी तक यह लागत कमी पूरी तरह से प्रतिबिंबित नहीं हुई है या बिजली वितरण कंपनियों ने इस लाभ को उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचाया है। छत्तीसगढ़ जैसे कोयला उत्पादन वाले इलाकों में तो बिजली बिल में मामूली कमी की संभावना जताई गई है, मगर सरकार द्वारा लागू 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ करने की योजना को 100 यूनिट कर देना बिजली उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ा रहा है।
टैक्स ढांचे में तो सुधार हुआ है और कोयला क्षेत्र की उत्पादन लागत में कटौती निश्चित है, परंतु एक्सपर्ट्स और पावर जनरेशन कंपनियों के अनुसार इस लाभ का असर उपभोक्ताओं को बिजली बिल के रूप में अभी तक पूर्णता नहीं मिला है। कस्टमर स्तर पर राहत दिखाने में अभी देरी हो रही है।

कोयले पर नए कर सुधार के फायदे
- 400 रुपए प्रति टन का सेस हटने से कोयले की कीमत में प्रति टन 250-300 रुपए की कटौती होगी।
- बिजली उत्पादन की लागत में प्रति यूनिट लगभग 11 से 18 पैसे तक की कमी आएगी।
- उद्योगों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का भी फायदा मिलेगा जिससे उत्पादन लागत घटेगी।
- कोयला की गुणवत्ता के अनुसार कर बोझ समतल हो गया है, जिससे सिस्टम में पारदर्शिता आई है।
👉 हमारे WhatsApp channel से जुड़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें👇👇
https://whatsapp.com/channel/0029VbALQC677qVNwdR5Le3V



