
ग्रेटर Noida बिमटेक Hostel में रहस्यमयी गोलीकांड MBA छात्र की मौत दोस्त की हालत नाजुक
ग्रेटर नोएडा, 10 सितंबर 2025: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में नॉलेज पार्क-3 स्थित प्रतिष्ठित बिमटेक (बिमटेक इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी) कॉलेज के आरसीआई विद्या विहार हॉस्टल में मंगलवार सुबह एक सनसनीखेज घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया। हॉस्टल के एक कमरे में गोली चलने की आवाजों के बाद 22 वर्षीय एमबीए छात्र दीपक कुमार का सिर में गोली लगने से शव मिला, जबकि उसके दोस्त 23 वर्षीय देवांश चौहान गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद हॉस्टल में हड़कंप मच गया और पुलिस ने कमरे को सील कर फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में कमरे से एक लाइसेंसी रिवॉल्वर बरामद हुई है, लेकिन गोली किसने चलाई—हत्या, आत्महत्या या आपसी झगड़ा—यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है।

घटना का पूरा विवरण: सुबह की खौफनाक खोज
घटना मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे की बताई जा रही है। देवांश चौहान आगरा से अपने घर लौटकर हॉस्टल पहुंचा था, जहां वह अपने पिता सुरेंद्र सिंह चौहान के रिटायरमेंट पार्टी से लौट रहा था। सुरेंद्र सिंह हाल ही में उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) में सर्कल ऑफिसर के पद से रिटायर हुए थे। दीपक कुमार आंध्र प्रदेश के चिलकुलुरी गांव का रहने वाला था और बिमटेक में एमबीए के पहले वर्ष का छात्र था। दोनों छात्र अच्छे दोस्त थे, हालांकि वे रूममेट नहीं थे, लेकिन अक्सर एक साथ समय बिताते थे। दोनों ही अपनी कक्षा के टॉपर छात्र माने जाते थे।
हॉस्टल के सिक्योरिटी गार्ड सतवीर सिंह ने बताया कि सुबह कॉलेज के सभी छात्र क्लास के लिए निकल चुके थे। वह लाइटें चेक करने के लिए हॉस्टल के पहले फ्लोर पर पहुंचा, तभी एक कमरे से कराहने और चीख-पुकार की आवाज सुनाई दी। गार्ड ने दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन वह अंदर से बंद था। उसने तुरंत हॉस्टल वार्डन को सूचना दी। वार्डन के नेतृत्व में स्टाफ ने बालकनी की ओर से सीढ़ी लगाकर खिड़की का शीशा तोड़ा और कमरे में घुसे। अंदर का नजारा खौफनाक था—कमरा खून से सना हुआ था। दीपक कुमार सिर में गोली लगे बिना हिले-डुले पड़ा था, जबकि देवांश सिर पर चोट लगे गंभीर हालत में तड़प रहा था।

दोनों को तुरंत ग्रेटर नोएडा के कैलाश अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दीपक को मृत घोषित कर दिया। देवांश को आईसीयू में भर्ती किया गया, जहां वह जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है। पुलिस के अनुसार, दोनों को सिर में एक-एक गोली लगी थी। घटना के समय कमरा अंदर से बंद था, जिससे रहस्य और गहरा गया है।
रिवॉल्वर का राज: पिता की लाइसेंसी पिस्तौल कैसे पहुंची हॉस्टल?
पुलिस ने कमरे से एक लाइसेंसी रिवॉल्वर बरामद की, जिसमें छह कारतूस भरे हुए थे। इनमें से दो गोली चल चुकी थीं—दो खोखे कारतूस फर्श पर मिले। रिवॉल्वर देवांश के पिता सुरेंद्र सिंह चौहान की निजी पिस्तौल बताई जा रही है। सुरेंद्र ने पुलिस को बताया, “मैंने इसे घर के लॉक वाले अलमारी में रखा था। मुझे नहीं पता कि देवांश ने कब इसे ले लिया।” देवांश आगरा से सुबह 5 बजे निकला था और रिटायरमेंट पार्टी के बाद सीधा हॉस्टल लौटा। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि रिवॉल्वर हॉस्टल कैसे पहुंची और क्या देवांश ने इसे जानबूझकर साथ लिया था।
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