
रसोइयों की हड़ताल पर सरकार सख्त, स्कूलों में खाना नहीं बना तो हटाए जाएंगे संचालनकर्ता समूह
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन (मिड-डे मील) योजना को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। पिछले एक महीने से अधिक समय से जारी रसोइयों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण स्कूलों में भोजन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसे देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश जारी किया है कि यदि स्कूलों में भोजन बंद हुआ, तो रसोइयों के साथ-साथ संचालनकर्ता समूहों पर भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
वैकल्पिक व्यवस्था करना समूहों की जिम्मेदारी
मंत्रालय से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि रसोइयों की अनुपस्थिति की स्थिति में भोजन पकाने की वैकल्पिक व्यवस्था करना संचालनकर्ता समूहों का दायित्व है। यदि भोजन का संचालन बाधित होता है, तो संबंधित समूह को हटाने, उनके मानदेय में कटौती और ‘कुर्की कास्ट’ में कटौती जैसी सख्त कार्रवाई की जा सकती है। यह आदेश प्रदेश के सभी कलेक्टरों को भेज दिया गया है।

86,000 रसोइयों की हड़ताल से ठप पड़ी योजना
गौरतलब है कि पिछले 30 दिनों से प्रदेश के लगभग 86,000 रसोइया अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। रसोइयों के काम बंद करने से कई स्कूलों में बच्चों को गर्म भोजन नहीं मिल पा रहा है। प्रशासन का यह आदेश इसी व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने की एक कोशिश है।
रसोइया संघ ने जताया विरोध
इधर, रसोइया संघ ने इस सरकारी फरमान को ‘तानाशाही’ और आंदोलन कुचलने की साजिश करार दिया है। संघ का कहना है कि एक ओर शिक्षा मंत्री उनकी मांगों को जायज बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकारी दबाव बनाकर उनके लोकतांत्रिक अधिकार को छीनने की कोशिश कर रहे हैं। संघ ने साफ कर दिया है कि वे ऐसे दबाव में पीछे हटने वाले नहीं हैं।
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