
गिरफ्तार या 30 दिन हिरासत पर PM/CM का पद छिन जाएगा: संसद में नया विधेयक प्रस्तुत, विपक्ष का विरोध
नई दिल्ली: भारत सरकार ने लोकसभा में एक बड़ा और ऐतिहासिक विधेयक पेश किया है, जिसके तहत यदि कोई प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री किसी भी अपराध में गिरफ्तार होता है या 30 दिन या उससे अधिक समय तक हिरासत में रहता है, तो उसका पद छिन जाएगा।

यह प्रावधान 5 साल या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में लागू होगा। इस विधेयक के आने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त हंगामा देखा गया और सरकार को प्रस्तावित बिल को संयुक्त संसद समिति (JPC) के पास भेजना पड़ा।
संसद में गृह मंत्री का बयान
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में बताया कि तीन अहम विधेयक संसद में पेश किए गए हैं। इसका उद्देश्य भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और साक्ष्य अधिनियम में व्यापक बदलाव करना है।
तीनों बिलों में मुख्य बातें निम्न हैं:

भारतीय दंड संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025: 130वीं बार कोई संशोधन लाया गया है, जिससे केंद्र और राज्य सरकारों पर नए कानून लागू होंगे।
आपराधिक प्रक्रिया संहिता संशोधन विधेयक, 2025: इसमें न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और त्वरित करने पर जोर है।
भारतीय साक्ष्य अधिनियम (संशोधन) विधेयक, 2025: सबूतों की स्वीकार्यता, टेक्नोलॉजी के उपयोग और डिजिटल साक्ष्य को अधिक मजबूत बनाना।
नए विधेयकों के खास प्रावधान
यदि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को किसी भी अपराध में अदालत 30 दिन से अधिक हिरासत में भेजती है या गिरफ्तारी होती है, तो उन्हें पद छोड़ना पड़ेगा।
यह प्रावधान केवल उन्हीं अपराधों पर लागू होगा, जिनमें 5 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है।
सरकार का कहना है कि इससे राजनीति में आपराधिक तत्वों की रोकथाम होगी और संवैधानिक पदों की गरिमा बनी रहेगी।
विपक्ष ने इन बिलों को संविधानप्रति असंगत बताते हुए इसे JPC को भेजने की मांग की।
विपक्ष का तर्क
कांग्रेस, AIMIM और अन्य विपक्षी दलों ने कहा कि यह विधेयक लोकतंत्र को कमजोर करेगा और सरकार को अन्यायपूर्ण शक्तियाँ देगा।

इनके अनुसार, यह संशोधन राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए भी किया जा सकता है।
सरकार का पक्ष है कि इस कदम से संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्ति पर जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
यह बहस ऐसे समय पर आ रही है जब देश की राजनीति में अपराधियों की संख्या बढ़ने की चिंता बार-बार उठती रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव विश्लेषणों के अनुसार, 241 सांसदों पर आपराधिक मामले चल रहे हैं, जिनमें कई मुख्यमंत्री और सांसद भी शामिल हैं। सरकार का दावा है कि नया कानून राजनीति की शुचिता लौटाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
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