
गवर्नर विधेयकों को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रख सकते: Supreme Court
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों को गवर्नर अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रख सकते। कोर्ट ने कहा कि गवर्नर को एक उचित समय सीमा के भीतर विधेयक पर कार्रवाई करनी होगी।

गवर्नर को तीन विकल्प—टालमटोल नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी राज्य के गवर्नर के पास विधेयक आने पर तीन ही विकल्प हैं—
1. विधेयक को मंजूरी देना,
2. उसे पुनर्विचार के लिए विधानसभा को लौटाना, या
3. उसे राष्ट्रपति के विचारार्थ भेजना।
कोर्ट ने जोर देकर कहा कि इन तीन विकल्पों के अलावा गवर्नर के पास विधेयक को “लंबित” रखने का कोई अधिकार नहीं है।
असमंजस या देरी पर कोर्ट का हस्तक्षेप
हालांकि कोर्ट ने कोई नियत समय सीमा तय नहीं की, लेकिन यह स्पष्ट किया कि यदि कोई गवर्नर अनुचित देरी करता है, तो सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप करने से नहीं हिचकिचाएगा। अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने वाली ऐसी देरी को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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